नई दिल्ली: अपोलो रिसर्च एंड इनोवेशन ने आयोजित किया चौथा क्लिनिकल रिसर्च कॉन्क्लेव

Kittu Kumari7 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
नई दिल्ली: अपोलो रिसर्च एंड इनोवेशन ने आयोजित किया चौथा क्लिनिकल रिसर्च कॉन्क्लेव

स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक बदलावों और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में अपोलो क्लिनिकल रिसर्च कॉन्क्लेव का चौथा संस्करण शुरू हुआ। 7 अक्टूबर 2026 को शुरू हुए इस दो दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन का मुख्य विषय 'रीइमेजिनिंग फ्यूचरिस्टिक क्लिनिकल रिसर्च फॉर इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर इनोवेशन' रखा गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में नए नवाचारों को बढ़ावा देना और स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाना है।

इस खास मौके पर भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सचिव श्री वैद्य राजेश कोटेचा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और उन्होंने उद्घाटन भाषण दिया। कार्यक्रम में एम्स कल्याणी के अध्यक्ष प्रोफेसर वाई के गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण प्लेनरी सत्र का संचालन किया। इस कॉन्क्लेव में क्लिनिकल रिसर्च, फार्मास्यूटिकल्स, हेल्थकेयर, मेडिकल डिवाइसेज और रेगुलेटरी बॉडीज जैसे विभिन्न क्षेत्रों से आए 350 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

हेल्थकेयर स्टार्टअप्स और AI पर जोर

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कॉन्क्लेव के पहले दिन विशेषज्ञों ने प्रिसिजन मेडिसिन, नई दवाओं के विकास, सेल और जीन थेरेपी के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित क्लिनिकल ट्रायल्स और रियल-वर्ल्ड एविडेंस जैसे गंभीर विषयों पर गहन चर्चा की। आयोजन में एक 'स्टार्टअप शोकेस' भी रखा गया, जिसके जरिए स्वास्थ्य क्षेत्र में उभर रहे नए समाधानों और तकनीकी नवाचारों को प्रदर्शित किया गया।

इस आयोजन में सीडीएससीओ (CDSCO), सन फार्मा, फाइजर, मैनकाइंड फार्मा, बेयर, एस्ट्राजेनेका और मेडट्रोनिक जैसी बड़ी कंपनियों और संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम के सफल संचालन में इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डीएमएस लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. बिपिन पुरी, एआरआई की ऑपरेशंस डायरेक्टर डॉ. जयंती स्वामीनाथन और अस्पताल के सीईओ डॉ. गौरव कत्याल जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की अहम भूमिका रही।

कार्यक्रम के दूसरे दिन का फोकस मुख्य रूप से मेडटेक और हेल्थकेयर स्टार्टअप्स, इनोवेशन इकोसिस्टम और इंटीग्रेटिव मेडिसिन पर रहेगा। साथ ही, इंडस्ट्री और एकेडेमिया के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा ताकि रिसर्च का लाभ आम मरीजों तक तेजी से पहुंच सके।

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