अंकिता भंडारी केस: इंडिया गेट से माता-पिता हिरासत में, अब 24 घंटे का अल्टीमेटम

देश की राजधानी दिल्ली में अंकिता भंडारी मर्डर केस को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। गुरुवार सुबह इंडिया गेट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे अंकिता के माता-पिता और कई विपक्षी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में हंगामा मच गया और कांग्रेस नेताओं ने पुलिस स्टेशन के भीतर ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालांकि, बाद में तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन से अंकिता के माता-पिता को रिहा कर दिया गया।
रिहाई के बाद अंकिता के परिवार ने एक बार फिर न्याय की गुहार लगाई है। परिवार का मुख्य विरोध भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने को लेकर है। अंकिता के पिता ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी चिंताओं का समाधान 24 घंटे के भीतर नहीं किया गया, तो उत्तराखंड के लोग सड़कों पर उतर आएंगे। उन्होंने मांग की है कि जब तक इस मामले से जुड़े आरोपों की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक राज्यपाल की इस नियुक्ति को रोक दिया जाना चाहिए।
कॉल रिकॉर्ड्स के खुलासे की मांग और विपक्ष का हमला
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि 18 और 19 सितंबर 2022 की अवधि के दौरान अजय कुमार और दुष्यंत कुमार की लोकेशन डिटेल्स और कॉल रिकॉर्ड्स सार्वजनिक किए जाएं। अंकिता की मां ने भावुक होते हुए कहा, "मैं सिर्फ अपनी बेटी के लिए न्याय चाहती हूं। यह लड़ाई सिर्फ मेरी बेटी की नहीं, बल्कि हर बेटी की लड़ाई है।"
इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार की आलोचना करते हुए इसे "कायरता और संवेदनहीनता की पराकाष्ठा" बताया। उन्होंने कहा कि एक तरफ न्याय की गुहार लगा रहे माता-पिता को हिरासत में लिया गया, वहीं दूसरी तरफ एक भाजपा 'VIP' को राज्यपाल के पद से पुरस्कृत किया गया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस कार्रवाई पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब सुबह 4 बजे अंकिता के माता-पिता को सिर्फ इसलिए उठा लिया गया क्योंकि वे शांतिपूर्वक यह मांग कर रहे थे कि सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल न बनाया जाए। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी तब तक इस परिवार के साथ खड़ी रहेगी, जब तक अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता।