अनिसिया बत्रा सुसाइड केस: दिल्ली हाई कोर्ट ने मयंक सिंघवी को सभी आरोपों से किया मुक्त

दिल्ली हाई कोर्ट ने फ्लाइट अटेंडेंट अनिसिया बत्रा की मौत के मामले में मयंक सिंघवी और उनके माता-पिता को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है।

Kittu Kumari4 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
अनिसिया बत्रा सुसाइड केस: दिल्ली हाई कोर्ट ने मयंक सिंघवी को सभी आरोपों से किया मुक्त

दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2018 के चर्चित अनिसिया बत्रा सुसाइड केस में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने फ्लाइट अटेंडेंट अनिसिया बत्रा के पति मयंक सिंघवी को क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों से बरी कर दिया है। जस्टिस मधु जैन ने इस मामले की सुनवाई करते हुए न केवल मयंक, बल्कि उनके माता-पिता को भी सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है।

यह पूरा मामला जुलाई 2018 का है, जब दक्षिण दिल्ली के पंचशील पार्क स्थित अपने घर की छत से गिरने के बाद 39 वर्षीय अनिसिया बत्रा की मौत हो गई थी। वह एक जर्मन एयरलाइन में फ्लाइट अटेंडेंट थीं। इस घटना के बाद उनके परिवार और राज्य सरकार ने मयंक सिंघवी और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन अब हाई कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में उन्हें राहत दी है।

अदालत ने क्यों हटाया आरोप?

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कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) द्वारा पेश किए गए सबूत यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे कि मयंक ने आत्महत्या के लिए उकसाया था। जस्टिस मधु जैन ने कहा कि वैवाहिक जीवन में तनाव, आपसी झगड़े या कड़वाहट होने का मतलब यह नहीं है कि उसे सीधे तौर पर आत्महत्या के लिए उकसावा माना जाए। जब तक कोई ठोस सबूत न हो कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर ऐसा कदम उठाने के लिए प्रेरित किया, तब तक आईपीसी की धारा 107 के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती।

दहेज मृत्यु (धारा 304B) के आरोपों पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि शादी के सात साल के भीतर किसी की असामान्य मृत्यु होने मात्र से उसे दहेज मृत्यु नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि शादी के दौरान होने वाले वित्तीय लेन-देन को तब तक दहेज नहीं कहा जा सकता, जब तक कि उसका सीधा संबंध शादी की शर्त से न हो।

कोर्ट ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि आजकल वैवाहिक विवादों में पूरे परिवार को झूठे आरोपों में घसीटने का चलन बढ़ गया है। अदालत ने कहा कि रिश्तेदारों को सिर्फ इसलिए आरोपी नहीं बनाया जाना चाहिए क्योंकि वे पति के परिवार के सदस्य हैं। यह फैसला साकेत सेशन कोर्ट के दिसंबर 2019 के उस आदेश की पुष्टि करता है, जिसे अनिसिया की मां और राज्य सरकार ने चुनौती दी थी।

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