वोटर लिस्ट संशोधन पर अनिल देसाई का हमला, बोले- जिम्मेदारी तय करे चुनाव आयोग

शिवसेना (UBT) के सांसद अनिल देसाई ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी कवायद में कई खामियां सामने आई हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने अब तक इन पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। देसाई का कहना है कि जब जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की बात हो, तो जवाबदेही तय होनी चाहिए और किसी को तो इस स्थिति की जिम्मेदारी लेनी होगी।
अनिल देसाई ने विशेष रूप से महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लगभग नौ करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से करीब दो करोड़ नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस बड़े पैमाने पर नाम कटने से मतदाताओं के बीच भारी चिंता और घबराहट का माहौल है। देसाई ने कड़े शब्दों में मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त को इन गलतियों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। इसी विरोध को दर्ज कराने के लिए उन्होंने अगले दिन विरोध मार्च निकालने की बात भी कही।
फॉर्म 6 में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 (नए मतदाताओं के नामांकन फॉर्म) में किए गए बदलावों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म 6 के किसी भी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। यह मामला तब उठा जब चुनाव आयोग ने दावा किया था कि ऑनलाइन फॉर्म 6 में जोड़ा गया नया घोषणा पत्र शीर्ष अदालत द्वारा अनुमोदित है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और उनके सहयोगियों की बेंच ने कहा कि वे रिकॉर्ड की जांच करेंगे ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर यह बदलाव किसने और कैसे किए। दरअसल, नए फॉर्म में आवेदकों से यह पूछा जा रहा है कि क्या वे या उनके माता-पिता पिछले SIR में मैप किए गए थे, जो कि अन्य राज्यों में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म का हिस्सा नहीं था।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों की खबरों को खारिज कर दिया है। आयोग का दावा है कि SIR से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और तीनों आयुक्तों की इसमें सहमति थी। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि कुछ चुनाव आयुक्तों ने मतदाता पंजीकरण और तकनीकी प्रणालियों को लेकर कई बार आपत्तियां जताई थीं।