IIT Delhi में ANIDEL Handloom Hackathon 2.0 का समापन, हथकरघा क्षेत्र के लिए आए शानदार Tech Innovations

नई दिल्ली के IIT Delhi में ANIDEL Handloom Hackathon 2.0 का ग्रैंड फिनाले 1 अगस्त 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस आयोजन का मुख्य विषय “Weaving Innovations” था।
- वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) के सहयोग से आयोजित
- देश भर से 2,500 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
- टॉप 100 शॉर्टलिस्टेड टीमों से 280 इनोवेटर्स शामिल हुए
हथकरघा क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय मंच
यह नेशनल लेवल का इनोवेशन चैलेंज छात्रों, डिजाइनरों, टेक्नोलॉजिस्ट्स, उद्यमियों, बुनकरों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को एक साथ लेकर आया। इसका उद्देश्य भारत के हथकरघा (handloom) क्षेत्र को फिर से जीवंत करने के लिए टेक्नोलॉजी-आधारित समाधान विकसित करना था। इसके मुख्य फोकस क्षेत्रों में डिफाइन और ऑपरेशंस में इनोवेशन, मार्केट एक्सेस और डिजिटल इंटीग्रेशन, स्थिरता (sustainability) और पर्यावरण प्रभाव, तथा बुनकर आजीविका और वित्तीय समावेशन शामिल थे।
वस्त्र मंत्रालय में विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत और आधुनिक तकनीक के तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हथकरघा हमारी समृद्ध विरासत का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि तकनीक भविष्य का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने भारतीय हथकरघा पोर्टल (Indian Handmade Portal) जैसी पहलों का भी हवाला दिया, जो बिचौलियों के बिना वैश्विक स्तर पर उत्पाद बेचने के लिए एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए PIB Press Release देख सकते हैं।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और आगामी सहायता
इस हैकाथॉन में लूम आधुनिकीकरण, डिजाइन इनोवेशन, बाजार पहुंच और बुनकर आजीविका जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान किया गया। IIT दिल्ली के टेक्सटाइल एंड फाइबर इंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख डॉ. दीप्ति गुप्ता ने घोषणा की कि वस्त्र मंत्रालय की एक संयुक्त पहल के तहत अगले सप्ताह IIT दिल्ली में Centre of Excellence for Handloom Technology का उद्घाटन किया जाना प्रस्तावित है।
इस केंद्र का उद्देश्य हथकरघा के साथ तकनीक के एकीकरण को बढ़ाना है। कार्यक्रम में बुनकर आजीविका के लिए AI-सक्षम प्लेटफॉर्म और डिजिटल मार्केट एक्सेस टूल्स सहित विभिन्न इनोवेटिव समाधान प्रदर्शित किए गए। शीर्ष फाइनलियस्ट्स को अपने समाधानों को और विकसित करने के लिए एक साल की संरचित इन्क्यूबेशन सहायता मिलने वाली है।