पर्सनैलिटी राइट्स केस: समझौता नहीं हुआ तो कोर्ट में खुद हाजिर हों अमिताभ बच्चन, दिल्ली हाई कोर्ट का निर्देश

दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन को अपने पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से एक महत्वपूर्ण निर्देश मिला है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि इस मामले में समझौता अधूरा रहता है और बच्चन अपने दावों को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।
जस्टिस पुरुषिंद्र कुमार कौरव ने यह निर्देश तब दिया जब अदालत को बताया गया कि मध्यस्थता के जरिए कुछ प्रतिवादियों के साथ आपसी सहमति बन गई है। हालांकि, बच्चन की ओर से कुछ लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण औपचारिक समझौते पर अभी हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं। कोर्ट ने बच्चन को जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने और औपचारिक समझौते को रिकॉर्ड पर लाने के लिए समय दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
क्या है पूरा विवाद और कोर्ट की शर्त?
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि समझौता नहीं होता है या अधूरा रहता है, तो बच्चन की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य होगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कोर्ट सिविल प्रोसीजर कोड, 1908 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सके।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब अमिताभ बच्चन ने अपनी सेलिब्रिटी इमेज, नाम, आवाज और तस्वीरों के अनधिकृत उपयोग के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कई व्यक्ति और कंपनियां उनकी अनुमति के बिना उनके व्यक्तित्व का इस्तेमाल अपने सामान और सेवाओं के प्रचार के लिए कर रहे हैं। बच्चन ने कोर्ट से स्थायी रोक (permanent injunction) की मांग की थी ताकि उनके व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों का व्यावसायिक लाभ के लिए गलत इस्तेमाल न हो सके।
गौरतलब है कि 25 नवंबर, 2022 को दिल्ली हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में अंतरिम आदेश जारी किया था। तब से यह मामला लंबित है और अब कोर्ट यह देखना चाहता है कि क्या सभी पक्षों के बीच पूरी तरह से समझौता हो पाता है या मामले को कानूनी प्रक्रिया के जरिए आगे ले जाना होगा।