अमिताभ बच्चन को दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश, व्यक्तित्व अधिकारों के मामले में व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा

दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन को अपने व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) से जुड़े एक कानूनी विवाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। जस्टिस पुरुषइंद्र कुमार कौरव ने 9 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि मामले में चल रही समझौते की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो अभिनेता को अगली सुनवाई में खुद उपस्थित होना होगा।
यह पूरा मामला साल 2022 में शुरू हुआ था जब अमिताभ बच्चन ने अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए रजत नागी और अन्य लोगों के खिलाफ याचिका दायर की थी। कोर्ट को बताया गया कि कुछ प्रतिवादियों के साथ मध्यस्थता के जरिए एक आपसी सहमति बन गई है, लेकिन कुछ तकनीकी और लॉजिस्टिक कारणों से बच्चन की ओर से अभी तक औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं।
समझौता नहीं हुआ तो 16 नवंबर को कोर्ट आना होगा
अदालत ने वादी (अमिताभ बच्चन) को इन औपचारिकताओं को पूरा करने और हस्ताक्षरित दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लाने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। हालांकि, जस्टिस कौरव ने सख्त लहजे में कहा कि अगर यह समझौता अंतिम रूप नहीं लेता है और अभिनेता मुकदमे को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें 16 नवंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य होगा।
यह न्यायिक निर्देश सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के ऑर्डर X रूल 2 और ऑर्डर V रूल 3 के साथ-साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 168 के आधार पर दिया गया है। गौरतलब है कि 25 नवंबर 2022 को इस मामले में बच्चन के पक्ष में एक अंतरिम आदेश दिया गया था। इस कानूनी लड़ाई में अभिनेता की ओर से वकील ध्रुव आनंद, धनंजय खन्ना और भव्य वर्मा पैरवी कर रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ विनय मोहन शर्मा, टीना गर्ग और अन्य प्रतिवादी शामिल हैं।