यमुना की सफाई के लिए बड़ा कदम: अमित शाह ने दिल्ली में 8,941 करोड़ की परियोजनाओं का किया आगाज
गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में यमुना को साफ करने के लिए 8,941 करोड़ रुपये के 43 प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ और शिलान्यास किया।

दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी पहल की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने द्वारका में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान लगभग 8,941 करोड़ रुपये की लागत वाले 43 यमुना कायाकल्प प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास किया। गृह मंत्री ने दिल्लीवासियों को भरोसा दिलाया कि ये योजनाएं यमुना की सफाई के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होंगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यभार संभालते ही इस दिशा में प्राथमिकता तय की थी और खुशी की बात यह है कि तय किए गए कार्यों का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पहले ही पूरा हो चुका है।
सीवेज ट्रीटमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर
दिल्ली जल मंत्री परवेश साहिब सिंह वर्मा द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस पूरे अभियान में 10 प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया गया है जिनकी लागत 2,827.11 करोड़ रुपये है, जबकि 33 अन्य प्रोजेक्ट्स की नींव रखी गई है जिनकी कीमत 6,114.11 करोड़ रुपये है। इस योजना के तहत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं:
- ओखला एसटीपी: 1,161 करोड़ रुपये की लागत से ओखला में 124 MGD का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा रहा है।
- क्षमता विस्तार: आठ मौजूदा एसटीपी को 1,041 करोड़ रुपये की लागत से अपग्रेड किया जाएगा, जिससे उनकी क्षमता 78.2 MGD से बढ़कर 140.8 MGD हो जाएगी। इसका सीधा लाभ करीब 78.5 लाख लोगों को मिलेगा।
- बाहरी दिल्ली का विकास: बाहरी दिल्ली की 358 अनधिकृत कॉलोनियों और 113 गांवों के 36.29 लाख निवासियों के लिए 3,113.67 करोड़ रुपये की लागत से 29 नए विकेंद्रीकृत एसटीपी और पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे।
- नेटवर्क और ड्रेन: 1,691 करोड़ रुपये से 1,034 किलोमीटर का नया सीवर नेटवर्क बिछाया जाएगा और मुंडका में 225.02 करोड़ रुपये की लागत से 4.5 किलोमीटर लंबी ट्रंक ड्रेन बनाई जाएगी।
- पेयजल सुविधा: चंद्रावल में 298.3 करोड़ रुपये की लागत से 477 MLD का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगेगा, जिससे 22 लाख लोगों को फायदा होगा।
मंत्री वर्मा ने स्पष्ट किया कि सरकार की पूरी रणनीति इस बात पर केंद्रित है कि कोई भी बिना उपचार वाला गंदा पानी या कचरा नदी में न गिरे। लक्ष्य यह है कि अगले ढाई वर्षों के भीतर यमुना में गिरने वाले अनुपचारित अपशिष्ट को पूरी तरह रोक दिया जाए। गौरतलब है कि इससे पहले 18 अक्टूबर 2026 को 'चलो यमुना' अभियान चलाया गया था, जिसमें 35,000 से अधिक लोगों ने नदी के 70 घाटों से 76,755 किलोग्राम ठोस कचरा हटाकर अपनी जागरूकता का परिचय दिया था।