यमुना की सफाई के लिए अमित शाह ने शुरू की 8941 करोड़ की बड़ी परियोजना
गृह मंत्री अमित शाह ने यमुना को प्रदूषण मुक्त करने और दिल्ली में जल आपूर्ति बढ़ाने के लिए 8,941 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की।

दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने और शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 22 अक्टूबर, 2026 को 8,941.22 करोड़ रुपये के भारी-भरकम प्रोजेक्ट पैकेज का आगाज़ किया। इस पहल के तहत गृह मंत्री ने दिल्ली जल बोर्ड के 10 पूरे हो चुके प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया और साथ ही 33 नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस पूरे मिशन का मुख्य उद्देश्य यमुना में गिरने वाले बिना उपचारित सीवेज (untreated sewage) को रोकना और दिल्ली के करीब 1.5 करोड़ लोगों तक साफ पानी की पहुंच सुनिश्चित करना है।
सीवेज ट्रीटमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
इस महत्वाकांक्षी योजना में तकनीकी सुधारों पर विशेष ध्यान दिया गया है। ओखला में 1,161 करोड़ रुपये की लागत से एक नया 124 MGD का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा रहा है। इसके अलावा, आठ मौजूदा प्लांटों को 1,041 करोड़ रुपये खर्च कर अपग्रेड किया जाएगा, जिससे उनकी क्षमता 78.2 MGD से बढ़कर 140.8 MGD हो जाएगी। बाहरी दिल्ली के इलाकों में बुनियादी ढांचे को बदलने के लिए 3,113.67 करोड़ रुपये से 29 विकेंद्रीकृत ट्रीटमेंट प्लांट और पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, जिससे 113 गांवों और 358 अनधिकृत कॉलोनियों को लाभ मिलेगा।
योजना के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर नज़र डालें तो:
- सीवर नेटवर्क: 1,691 करोड़ रुपये की लागत से 1,034 किलोमीटर लंबे सीवर नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।
- पुराने प्लांट का रिप्लेसमेंट: चंद्रवल में 298.3 करोड़ रुपये का नया वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगेगा, जो 1935 और 1955 के पुराने सिस्टम की जगह लेगा।
- सफाई का लक्ष्य: अमित शाह ने बताया कि नदी की सफाई के कुल लक्ष्य का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पहले ही पूरा किया जा चुका है।
यमुना की वर्तमान स्थिति काफी चिंताजनक रही है, जहां दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की रिपोर्ट में फिकल कोलीफॉर्म और बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड का स्तर सुरक्षित सीमा से कहीं ज्यादा पाया गया है। इसी वजह से नदी में झाग और मछलियों की मौत जैसी घटनाएं आम रही हैं। हालांकि, हाल ही में 'चलो यमुना' अभियान के जरिए जनता ने भी अपनी जागरूकता दिखाई, जिसमें 35,000 लोगों ने मिलकर 70 घाटों से करीब 76,755 किलो कचरा हटाया।
अधिकारियों का दावा है कि ये सभी नए प्रोजेक्ट अगले 24 से 30 महीनों के भीतर पूरे कर लिए जाएंगे। अब सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि क्या यह भारी निवेश वास्तव में यमुना के पानी की गुणवत्ता को सुधार पाएगा और नदी को उसकी पुरानी शुद्धता वापस मिल पाएगी।