अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली में बवाल: कैंपस क्लैश के बाद 10 छात्र निलंबित

राजधानी की अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली (AUD) में माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। मंगलवार शाम कश्मीरी गेट कैंपस में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रशासन ने बुधवार को आदेश जारी करते हुए 10 छात्रों को निलंबित कर दिया है। यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब 28 सितंबर से कैंपस में एक अनिश्चितकालीन धरना चल रहा था, जो अब एक बड़े विवाद में बदल चुका है।
यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सत्यकेतु संकृत के नेतृत्व में प्रशासन ने बताया कि यह फैसला प्रॉक्टोरियल बोर्ड की शुरुआती रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर लिया गया है। यूनिवर्सिटी का आरोप है कि 13 अक्टूबर की घटना के दौरान छात्रों ने अनुशासनहीनता की हदें पार कीं, यूनिवर्सिटी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और स्टाफ के साथ अभद्र व्यवहार किया। अधिकारियों का दावा है कि सुरक्षाकर्मियों के साथ हाथापाई की गई, जिसके बाद मामले को विस्तृत जांच के लिए अनुशासन समिति (Disciplinary Committee) को सौंप दिया गया है।
छात्रों और प्रशासन के दावों में टकराव
निलंबित किए गए छात्रों में कश्मीरी गेट और लोधी रोड कैंपस के वर्तमान और पूर्व छात्र परिषद प्रतिनिधि शामिल हैं। करमपुर कैंपस की छात्र परिषद के कोषाध्यक्ष विवेक मिश्रा और दो प्रथम वर्ष के छात्र भी इस सूची में हैं। हालांकि, सस्पेंड छात्रों को इस सेमेस्टर की परीक्षाओं और असेसमेंट में बैठने की अनुमति दी गई है, लेकिन उन्हें कैंपस में प्रवेश करने से रोक दिया गया है।
दूसरी ओर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और अन्य प्रदर्शनकारी छात्रों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने बिना किसी 'कारण बताओ नोटिस' (Show-cause notice) के सीधे निलंबन का आदेश दे दिया। उनका आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों और पुलिस ने छात्रों पर हमला किया और विरोध प्रदर्शन की सामग्री को जबरन हटाया। छात्रों ने यह भी दावा किया कि 13 अक्टूबर को जब वे एक डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग कर रहे थे, तब यूनिवर्सिटी ने जानबूझकर बिजली काट दी। कुछ छात्रों का तो यहाँ तक कहना है कि जिन लोगों के नाम निलंबन सूची में हैं, वे घटना के समय वहां मौजूद ही नहीं थे।
इस पूरे विवाद की जड़ में कुछ प्रमुख मांगें हैं। छात्र चाहते हैं कि पीएचडी स्कॉलर्स के लिए अनिवार्य उपस्थिति और प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति जैसे जुलाई 31 के सर्कुलर वापस लिए जाएं। इसके अलावा, कैंपस से आंतरिक बैरिकेड्स और लोहे के गेट हटाने, फीस माफी बहाल करने, शिक्षकों की भर्ती पूरी करने और यूनिवर्सिटी प्रशासन में छात्रों की भागीदारी बढ़ाने की मांग की जा रही है। कैंपस में भारी पुलिस बल की तैनाती और बैरिकेडिंग के बावजूद छात्रों ने अपने धरने को जारी रखने का संकल्प लिया है।