Ambedkar University Delhi में PhD की सख्त Attendance Policy पर बढ़ा विवाद

डॉ. बी. आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली (AUD) में PhD स्कॉलर्स के लिए नई और सख्त Attendance Policy लागू किए जाने के बाद से आलोचना शुरू हो गई है। इस नए नियम को सबसे पहले Indian Express द्वारा हाईलाइट किया गया था, जिसमें डॉक्टोरल कैंडिडेट्स के लिए लगभग पूरी Attendance अनिवार्य की गई है।
सख्त Attendance Rules और Policy Details
यूनिवर्सिटी की आधिकारिक पॉलिसी के अनुसार, जिसे आखिरी बार 30 जुलाई 2026 को अपडेट किया गया था, स्टूडेंट्स और PhD स्कॉलर्स को प्रत्येक सब्जेक्ट या कोर्स में 100% Attendance बनाए रखना आवश्यक है। वैध कारणों की वजह से अधिकतम 20% अनुपस्थिति की छूट दी जा सकती है [1, 2]।
परीक्षाओं के लिए पात्र होने के लिए स्टूडेंट्स को व्यक्तिगत कोर्स में कम से कम 80% Attendance सुनिश्चित करनी होगी; इस सीमा को पूरा करने में असफल रहने पर Re-admission की आवश्यकता होगी। ये संशोधित Attendance नियम एकेडमिक ईयर 2025-26 से प्रभावी हैं, जिसमें यूनिवर्सिटी का कहना है कि Attendance पर उसके निर्णय अंतिम और बाध्यकारी हैं [1, 2]।
अदालती मामले और Admission Process
यह कदम ऐसे व्यापक संदर्भ में उठाया गया है जहां भारत भर के विश्वविद्यालयों में Attendance Policies संस्थानों के बीच काफी भिन्न होती हैं, हालांकि एक सार्वभौमिक 75% नियम के बारे में आम धारणाएं हैं। मार्च 2026 में एक अलग लेकिन संबंधित घटनाक्रम में, दिल्ली हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालयों के भीतर फ्री स्पीच और शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति के महत्व पर जोर दिया जब उसने एक अंबेडकर यूनिवर्सिटी के छात्र के निष्कासन को रद्द कर दिया, जो यूनिवर्सिटी की अनुशासनात्मक कार्रवाइयों पर न्यायिक जांच को दर्शाता है।
इस बीच, AUD ने UGC PhD Regulations 2022 का पालन करते हुए 31 जुलाई 2026 को 2026 एकेडमिक सेशन के लिए PhD Admissions प्रक्रिया पूरी कर ली है।