अमेजन टास्क और फर्जी क्रिप्टो ट्रेडिंग से 4.29 लाख की ठगी, राजस्थान-मप्र से 6 साइबर क्रिमिनल्स गिरफ्तार

Kittu Kumari5 August 20263 min read33 viewsDelhi Local
अमेजन टास्क और फर्जी क्रिप्टो ट्रेडिंग से 4.29 लाख की ठगी, राजस्थान-मप्र से 6 साइबर क्रिमिनल्स गिरफ्तार

दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस के साइबर थाने ने अमेजन प्रमोशनल टास्क और फर्जी क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह ने दिल्ली के एक व्यक्ति को ऑनलाइन मोटा मुनाफा और कमीशन दिलाने का झांसा देकर 4.29 लाख रुपये की ठगी कर ली थी। मामले की जांच के बाद पुलिस ने राजस्थान और मध्य प्रदेश में छापेमारी कर गिरोह के छह सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपितों ने ठगी के लिए म्यूल बैंक खातों, फर्जी बैंकिंग क्रेडेंशियल और एटीएम के जरिए नकदी निकालने का पूरा नेटवर्क तैयार कर रखा था। दक्षिण पश्चिमी जिले के पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने मंगलवार को बताया कि गिरफ्तार आरोपितों की पहचान राजस्थान के जयपुर निवासी सुरेश कुमार यादव (28) और पूरण मल यादव (36), मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी अरशान मोहम्मद (22), गुफरान कुरैशी (23), अभिजीत पाटीदार (19) और आर्यन राठौर (19) के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार, पीड़ित को सबसे पहले व्हाट्सएप पर एक ग्रुप में जोड़ा गया, जहां खुद को अमेजन से जुड़ी डिजिटल मार्केटिंग कंपनी का प्रतिनिधि बताने वाले ठगों ने ऑनलाइन प्रमोशनल टास्क पूरे करने पर आकर्षक कमीशन का लालच दिया। शुरुआत में पीड़ित को छोटे-छोटे टास्क पूरे कराने के बाद कुछ रकम वापस भेजकर भरोसा जीता गया। इसके बाद पीड़ित को टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर Coinbase के नाम पर एक फर्जी क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म दिखाया गया, जिसमें नकली मुनाफा और बढ़ती हुई कमाई दिखाई जाती रही। इसी झांसे में आकर पीड़ित ने अलग-अलग यूपीआई आईडी और बैंक खातों में कुल 4.29 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब पीड़ित ने निवेश की गई रकम निकालने की कोशिश की तो ठगों ने ट्रेडिंग अकाउंट फ्रीज होने का बहाना बनाकर अकाउंट एक्टिवेशन और विदड्रॉल प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर और पैसे जमा कराने का दबाव बनाया। पीड़ित द्वारा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराने के बाद साइबर थाना, दक्षिण-पश्चिम जिले में ई-एफआईआर संख्या 281/26 दर्ज कर जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान पुलिस टीम ने बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजैक्शन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), एटीएम की सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया। वित्तीय लेनदेन की जांच में पुलिस उस बैंक खाते तक पहुंची जिसमें ठगी की रकम जमा हुई थी, जो जयपुर निवासी सुरेश कुमार यादव के नाम पर था। पूछताछ में सुरेश ने बताया कि उसने कमीशन के बदले अपना बैंक खाता, बैंकिंग क्रेडेंशियल और सिम कार्ड पूरण मल यादव को सौंप दिए थे, जिसके बाद पूरण मल यादव को भी गिरफ्तार कर लिया गया। आगे की जांच में पता चला कि ठगी की रकम का एक हिस्सा इंदौर स्थित एटीएम से निकाला गया था, जिसके आधार पर सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों से अरशान मोहम्मद और गुफरान कुरैशी की पहचान कर उन्हें इंदौर से गिरफ्तार किया गया। इनके कब्जे से मोबाइल फोन और साइबर ठगी से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए।

आगे की कार्रवाई में पुलिस ने अभिजीत पाटीदार और आर्यन राठौर को भी गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि अभिजीत ने अपना बैंक खाता आर्यन को कमीशन के बदले दिया था, जिसे बाद में गुफरान और अरशान तक पहुंचाया गया ताकि साइबर ठगी की रकम उसमें जमा कराई जा सके। पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ कि सभी छह आरोपित एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट के सक्रिय सदस्य हैं, जिनकी अलग-अलग जिम्मेदारियां बंटी थीं। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से छह मोबाइल फोन बरामद किए हैं जिनमें साइबर ठगी से संबंधित चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, साथ ही इंदौर के एटीएम से रकम निकालते समय अरशान और गुफरान द्वारा पहने गए कपड़े भी जब्त किए गए हैं।

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