लंच मीटिंग से दूरी पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया, बोले- 'डिप्लोमेसी जारी रहेगी'

इंडिया गठबंधन के सांसदों के बीच आयोजित एक महत्वपूर्ण लंच मीटिंग में शामिल न होने पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने इस अनुपस्थिति को कोई बड़ा मुद्दा बनाने के बजाय इसे गठबंधन के भीतर चलने वाली सामान्य 'डिप्लोमेसी' करार दिया है। यह बैठक 7 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मेजबानी में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग पर 'वोट चोरी' और चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर रणनीति तैयार करना था।
मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि इस तरह की मुलाकातें लगातार चलती रहती हैं और यह कोई आखिरी मौका नहीं था। उन्होंने कहा, "सिर्फ एक लंच नहीं होगा। आने वाले समय में आप सुनेंगे कि हमें चाय पर बुलाया गया था। अब अगर समोसों का कोई नारा गूंजता है, तो उसमें कोई बुराई नहीं है। कूटनीति (डिप्लोमेसी) चलती रहेगी।"
कम्युनिकेशन गैप और व्यस्तता बनी वजह
हालांकि अखिलेश यादव ने इसे सामान्य बताया, लेकिन समाजवादी पार्टी के सूत्रों ने इस अनुपस्थिति के पीछे कुछ अन्य कारण भी बताए हैं। पार्टी प्रतिनिधियों का दावा है कि कांग्रेस की ओर से सूचना देने में देरी हुई और कुछ सदस्यों को तो औपचारिक निमंत्रण तक नहीं मिला। इसके अलावा, राज्यसभा चुनावों से जुड़ी व्यस्तताओं और उसके तुरंत बाद लखनऊ रवाना होने की वजह से अखिलेश यादव इस बैठक में शामिल नहीं हो सके।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि उनका इरादा इंडिया गठबंधन के सभी दलों को आमंत्रित करने का था, लेकिन लंच आयोजित करने का फैसला अंतिम समय में लिया गया, जिसकी वजह से कुछ सदस्य नहीं पहुंच पाए। गौरतलब है कि इससे ठीक एक दिन पहले, 6 अक्टूबर को अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी सांसद चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, जहां कुछ नेताओं को हिरासत में भी लिया गया था। प्रदर्शन के बाद वे सीधे लखनऊ चले गए थे।