CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग: दिल्ली में 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में

Kittu Kumari11 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग: दिल्ली में 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में

देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर माहौल काफी गरमाया हुआ है। इस मांग को लेकर सड़क पर उतरे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) समेत कई संगठनों के 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। यह घटना तब हुई जब प्रदर्शनकारी आर के पुरम के पास से जंतर मंतर की ओर मार्च कर रहे थे, जहां पुलिस ने उन्हें रोक लिया।

हिरासत में लिए गए लोगों में केवल छात्र संगठन ही नहीं, बल्कि सीपीआई(एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास भी शामिल हैं। यह विरोध प्रदर्शन 2 अक्टूबर से तेज हो गया है, जिसमें स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) जैसे समूह भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का गंभीर आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं हुई हैं और चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिलीभगत कर रहा है।

भारी पुलिस बल की तैनाती और कड़े प्रतिबंध

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शहर में तनाव को देखते हुए प्रशासन ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 लागू कर दी है, जिसके तहत पांच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी है। पुलिस की भारी तैनाती कनॉट प्लेस और राजीव चौक जैसे इलाकों में की गई है, जिसकी वजह से कुछ समय के लिए मेट्रो सेवाएं बंद रहीं और मोबाइल इंटरनेट भी बाधित हुआ।

इस पूरे आंदोलन में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि कई बड़े चेहरे भी नजर आ रहे हैं। योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, कपिल सिब्बल, नित्या रामakrishnan और पल्लव सिसोदिया जैसे एक्टिविस्ट इसके साथ जुड़े हैं। वहीं आम आदमी पार्टी के नेता आतिशी, सौरभ भारद्वाज, संजीव झा और संजय सिंह ने भी इस मुहिम को समर्थन दिया है। पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग और पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जी.के. पिल्लई के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त को 'पीपल्स इमपीचमेंट नोटिस' सौंपने की कोशिश भी की थी।

दूसरी तरफ, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर मारपीट के आरोप लगाए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन सभी दावों को खारिज करते हुए अपनी आंतरिक निर्णय प्रक्रिया का बचाव किया है और चुनावी हेरफेर के आरोपों को गलत बताया है। वहीं, AISA की नेहा बोरा और CJP के अभिजीत डिपके ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह संघर्ष जारी रहेगा।

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