दिल्ली में 'तिरंगा मार्च' के दौरान AISA अध्यक्ष नेहा बोरा हिरासत में, भारी पुलिस बल तैनात

देश की राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को उस वक्त तनाव बढ़ गया जब 'लेहरा दो तिरंगा' मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई मंडी हाउस इलाके के पास की गई, जहां कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। पुलिस ने इस ऑपरेशन के दौरान नेहा बोरा के साथ-साथ CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और लगभग 150 अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया है।
इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। CPI नेता एनी राजा ने नेहा बोरा की लोकेशन को लेकर दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए हैं। देर रात तक अधिकारियों द्वारा उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, जिससे समर्थकों में चिंता बढ़ गई। AISA के पदाधिकारियों ने इस कार्रवाई को 'अपहरण' करार दिया है। उनका आरोप है कि नेहा बोरा को एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है और उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया है। संगीतकार विशाल ददलानी ने भी इन दावों की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें एक निजी वाहन के जरिए कहीं ले जाया गया है और वह फिलहाल लापता हैं।
भारी सुरक्षा बल की तैनाती और राजनीतिक प्रतिक्रिया
यह पूरा विरोध प्रदर्शन CJP सदस्यों सौरव दास और आशुतोष रंका की रिहाई की मांग को लेकर किया जा रहा था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने सेंट्रल दिल्ली और कनॉट प्लेस जैसे इलाकों में करीब 6,000 पुलिसकर्मी और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 220 कंपनियां तैनात की थीं।
इस मामले पर देश के बड़े नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस की इस कार्रवाई को 'अघोषित आपातकाल' बताया, वहीं तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने नेहा बोरा और अभिजीत दीपके की तत्काल रिहाई की मांग की है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार और भाजपा ने इस मार्च की आलोचना की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर देश में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने इस मार्च को 'सत्ता परिवर्तन' की कोशिश बताया है।