'लेहरा दो तिरंगा' प्रदर्शन के दौरान AISA अध्यक्ष नेहा बोरा हिरासत में, परिजनों और वकीलों ने जताया विरोध

देश की राजधानी दिल्ली में 'लेहरा दो तिरंगा' विरोध प्रदर्शन के बीच माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को नेहा बोरा मंडी हाउस में होने वाले प्रदर्शन की ओर जा रही थीं, तभी पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। इस कार्रवाई के बाद छात्र संगठन और उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
नेहा बोरा की हिरासत के बाद उनके वकील एडवोकेट माणिक गुप्ता ने संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। वकील का आरोप है कि पुलिस ने नेहा के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी और उनका फोन भी पुलिस के पास था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कानून के मुताबिक सूरज डूबने के बाद महिलाओं की गिरफ्तारी या हिरासत नहीं ली जा सकती, फिर भी एसीपी, डीसीपी और एसएचओ जैसे वरिष्ठ अधिकारियों ने उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं की।
गुमशुदगी और पुलिसिया कार्रवाई पर उठे सवाल
AISA के मुताबिक, नेहा बोरा को एक ऐसी कार में ले जाया गया जिसमें खिड़कियां नहीं थीं और शीशे काले थे। उन्हें मंगोलपुरी स्थित एंटी-नारकोटिक टास्क फोर्स के कार्यालय ले जाया गया, जहां कई घंटों तक उनसे संपर्क नहीं हो पाया। संगठन ने इस पूरी प्रक्रिया को 'लापरवाही' और 'अपहरण' जैसा बताया, क्योंकि उनके सहयोगियों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई। देर रात पता चला कि उन्हें करीब पांच घंटे तक एक डिटेंशन वैन में रखा गया था, जिसके बाद उन्हें आर.के. पुरम पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
बता दें कि यह पूरा विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क से लगभग 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को भी उनके आवास से हिरासत में लिया गया था।
इस मामले में अब राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अखिलेश यादव, एम.के. स्टालिन और सांसद जॉन ब्रिटास जैसे प्रमुख नेताओं ने नेहा बोरा की तत्काल रिहाई की मांग की है। एडवोकेट सुपंथा सिन्हा सहित अन्य कानूनी विशेषज्ञों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इस संबंध में जरूरी आवेदन भेजे हैं। हालांकि, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 43(5) महिलाओं की रात में गिरफ्तारी पर रोक लगाती है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में इसके नियम अलग हो सकते हैं।