सावधान! दिल्ली की जहरीली हवा बढ़ा रही है टाइप 2 डायबिटीज का खतरा, एक्सपर्ट्स ने चेताया

दिल्ली की जहरीली हवा सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि आपके शुगर लेवल को भी बिगाड़ रही है। एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी।

Kittu Kumari5 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
सावधान! दिल्ली की जहरीली हवा बढ़ा रही है टाइप 2 डायबिटीज का खतरा, एक्सपर्ट्स ने चेताया

दिल्ली में इस समय छाई घने स्मॉग की चादर सिर्फ सांस लेना मुश्किल नहीं कर रही, बल्कि यह आपके शरीर के अंदरूनी सिस्टम पर भी हमला कर रही है। विशेषज्ञों ने अब एक चौंकाने वाला खुलासा किया है कि वायु प्रदूषण और डायबिटीज जोखिम के बीच गहरा संबंध है। मैक्स हेल्थकेयर के एंडोक्रिनोलॉजी और डायबिटोलॉजी विभाग के ग्रुप चेयरमैन डॉ. अंबरीश मिथल के मुताबिक, वायु प्रदूषण अब टाइप 2 डायबिटीज का एक पुख्ता पर्यावरणीय कारण बन चुका है।

डॉ. मिथल ने समझाया कि हवा में मौजूद सूक्ष्म PM2.5 कण इतने छोटे होते हैं कि वे फेफड़ों के जरिए सीधे खून में मिल जाते हैं। इससे शरीर में सिस्टमिक इन्फ्लेमेशन (सूजन) बढ़ जाती है और रक्त वाहिनियों को नुकसान पहुंचता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि यह प्रक्रिया इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करती है और अग्न्याशय (pancreas) में इंसुलिन के स्राव को भी बाधित कर सकती है।

खतरनाक आंकड़े: एक महीना भी पड़ सकता है भारी

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क्लिनिकल डेटा के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति केवल एक महीने तक PM2.5 के उच्च स्तर के संपर्क में रहता है, तो उसके ब्लड शुगर लेवल में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। वहीं, लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने वालों में टाइप 2 डायबिटीज विकसित होने का खतरा 22% तक बढ़ जाता है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब दिल्ली की हवा बेहद जहरीली हो चुकी है। 5 नवंबर 2026 की सुबह 8 बजे तक शहर का AQI 482 दर्ज किया गया, जो 'गंभीर' (severe) श्रेणी में आता है।

प्रदूषण के कारणों पर नजर डालें तो ट्रांसपोर्ट उत्सर्जन से 15% से 18% और पराली जलाने से करीब 16% से 20% प्रदूषण फैल रहा है। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के मुताबिक, 7 नवंबर तक हालात 'बहुत खराब' से 'गंभीर' श्रेणी में ही रहने की आशंका है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 5 नवंबर से 20 नवंबर तक सभी निर्माण और विध्वंस (construction and demolition) गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है ताकि धूल और कणों के स्तर को कम किया जा सके।

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