AQLI रिपोर्ट की चेतावनी: वायु प्रदूषण घटा रहा है भारतीयों की उम्र, दिल्ली में सबसे बुरा हाल
AQLI 2025 की रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि वायु प्रदूषण भारतीय शहरों में जीवन प्रत्याशा को कम कर रहा है। दिल्ली की स्थिति सबसे गंभीर है।

भारत के बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के लिए हवा अब सिर्फ जहरीली नहीं रही, बल्कि यह उनकी जिंदगी के कीमती साल छीन रही है। शिकागो यूनिवर्सिटी के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट (EPIC) द्वारा जारी एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स (AQLI) 2025 की रिपोर्ट ने एक डराने वाला खुलासा किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, वायु प्रदूषण के कारण देश के प्रमुख शहरी केंद्रों में लोगों की जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) में भारी गिरावट आ रही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर दिल्ली की हवा की गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों (5 µg/m³) के अनुरूप होती, तो यहाँ के निवासी अपनी जिंदगी के 8.2 साल और ज्यादा जी सकते थे। सिर्फ दिल्ली ही नहीं, अन्य शहरों में भी स्थिति चिंताजनक है। कोलकाता के निवासियों की उम्र 4.1 साल, हैदराबाद के 3.2 साल, मुंबई के 3.1 साल, चेन्नई के 2.2 साल और बेंगलुरु के निवासियों की उम्र 2.1 साल तक बढ़ सकती थी, यदि हवा शुद्ध होती।
दिल्ली की हवा में 'गुड' डेज का नामोनिशान नहीं
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़े इस संकट की गंभीरता को और साफ करते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि साल 2024 और 2025 के दौरान दिल्ली में एक भी दिन ऐसा नहीं था जब हवा की गुणवत्ता 'अच्छी' श्रेणी में रही हो। यह सिलसिला 2026 में भी जारी है। 5 नवंबर 2026 तक दिल्ली का AQI 367 से 482 के बीच झूलता रहा, जो 'बहुत खराब' से 'गंभीर' श्रेणी में आता है। जहांगीरपुरी, पंजाबी बाग और नरेला जैसे इलाकों में तो प्रदूषण का स्तर 400 के पार पहुंच गया है।
प्रदूषण के इस जानलेवा स्तर के पीछे कई कारण हैं। स्थानीय स्तर पर वाहनों का धुआं, निर्माण कार्य और औद्योगिक गतिविधियां मुख्य वजह हैं। साथ ही, हवा की धीमी गति और तापमान में बदलाव (Temperature Inversion) ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से भी PM2.5 के स्तर में 16.28% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इस पर्यावरणीय संकट का असर सिर्फ सेहत पर ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। FICCI और EY इंडिया की 'क्लीन एयर, हेल्दी इंडिया' रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य खर्चों, काम करने की क्षमता में कमी और समय से पहले होने वाली मौतों के कारण भारत को अपनी जीडीपी का लगभग 9.5% सालाना नुकसान हो रहा है।
हालात को काबू करने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) द्वारा 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) लागू किया गया है, जबकि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) लंबे समय के लिए काम कर रहा है। हालांकि, अर्ली वार्निंग सिस्टम के मुताबिक, आने वाले कुछ दिनों तक दिल्ली की हवा 'बहुत खराब' से 'गंभीर' श्रेणी में रहने की संभावना है, जिसमें 6 और 7 नवंबर को स्थिति और भी बिगड़ सकती है।