AIIMS दिल्ली और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने टीबी रिसर्च के लिए मिलाया हाथ

देश के प्रतिष्ठित संस्थान AIIMS दिल्ली और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने मिलकर टीबी (तपेदिक) के खिलाफ एक महत्वपूर्ण रिसर्च प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य टीबी के बैक्टीरिया की जेनेटिक बनावट और उसके असर को गहराई से समझना है, ताकि मरीजों का इलाज बेहतर तरीके से किया जा सके। इस प्रोजेक्ट को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहल के तहत लॉन्च किया गया है।
6 अक्टूबर, 2026 को AIIMS दिल्ली के मेडिसिन विभाग में इस प्रोजेक्ट का औपचारिक शुभारंभ हुआ। इस रिसर्च का मुख्य फोकस 'माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस' के जीनोटाइप और फेनोटाइप का व्यापक अध्ययन करना है। सरल शब्दों में कहें तो, वैज्ञानिक यह देखेंगे कि टीबी के बैक्टीरिया की आनुवंशिक विशेषताएं किस तरह मरीज की सेहत और इलाज के नतीजों को प्रभावित करती हैं। इससे भविष्य में टीबी के प्रबंधन के लिए सटीक और प्रभावी क्लिनिकल सबूत जुटाने में मदद मिलेगी।
पब्लिक सेक्टर बैंक और मेडिकल रिसर्च का संगम
इस मौके पर AIIMS दिल्ली के डायरेक्टर प्रोफेसर निखिल टंडन ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और उसके सोशल फाउंडेशन ट्रस्ट के एमडी एवं सीईओ श्री आशीष पांडे का आभार व्यक्त किया। प्रोफेसर टंडन ने जोर देकर कहा कि जब देश के बड़े शैक्षणिक संस्थान और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक एक साथ आते हैं, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौतियों से निपटना आसान हो जाता है।
कार्यक्रम के दौरान यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के दिल्ली जोन के जनरल मैनेजर श्री एच. के. दास भी मौजूद रहे। यह साझेदारी न केवल भारत में टीबी को खत्म करने के राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान देगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इस बीमारी के इलाज में नई राहें खोलेगी। AIIMS ने दोहराया कि वह ऐसे इनोवेटिव रिसर्च पर काम करता रहेगा जिससे लैब की खोजें सीधे मरीजों के बेहतर इलाज में बदल सकें।