AIIMS सर्वे का खुलासा: बजट मिलने के बाद भी दिल्ली में मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण निष्क्रिय

राजधानी दिल्ली में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। एम्स (AIIMS) की एक टीम द्वारा किए गए व्यापक मूल्यांकन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दिल्ली स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी (SMHA) पूरी तरह से निष्क्रिय है। इस निष्क्रियता के कारण क्षेत्र में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पूरी तरह चरमरा गई है, जिसका सीधा असर मरीजों की सेहत और उनके अधिकारों पर पड़ रहा है।
नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे-2 (NMHS-2) और सिस्टम असेसमेंट के जरिए सामने आई इन जानकारियों को 4 अक्टूबर 2026 को साझा किया गया। एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. हर्षल रमेश ने बताया कि हालांकि नवंबर 2024 में इस अथॉरिटी के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई थी और बजट भी मंजूर हो चुका था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक एक भी कमेटी मीटिंग नहीं हुई है।
मरीजों की देखभाल और अधिकारों का संकट
नियमों के मुताबिक, SMHA की जिम्मेदारी दिल्ली भर में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी करना है। इसमें अस्पतालों में मनोचिकित्सकों की उपलब्धता, जरूरी दवाओं का स्टॉक और मरीजों के इलाज के स्तर की जांच शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि अथॉरिटी के काम न करने से न केवल मरीजों की देखभाल प्रभावित हुई है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य अधिकारों का कार्यान्वयन भी ठप पड़ गया है।
डॉ. रमेश ने इस संकट से निपटने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
- सामान्य चिकित्सकों (General Practitioners) को प्रशिक्षित किया जाए ताकि वे प्राथमिक स्तर पर ही मानसिक बीमारियों की पहचान और इलाज कर सकें।
- मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मोहल्ला क्लीनिक, प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स (PHCs) और छोटे अस्पतालों से जोड़ा जाए ताकि मरीजों को उनके घर के पास ही इलाज मिल सके।
बता दें कि एम्स द्वारा संचालित NMHS-2 पहल का मुख्य उद्देश्य दिल्ली में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के प्रसार, इलाज में आने वाली कमियों और पिछले नौ वर्षों में मानसिक बीमारियों के बोझ में हुए बदलावों को मापना है। इसी सिलसिले में 18 सितंबर को एक वर्कशॉप भी आयोजित की गई, जिसमें विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने वर्कफोर्स की कमी, बुनियादी ढांचे की बदहाली और दवाओं की किल्लत जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की और व्यवस्था में सुधार के प्रस्ताव दिए।