एम्स की नई स्टडी में खुलासा, किशोरियों में तेजी से बढ़ रहा मोटापा और पीसीओएस

दिल्ली एम्स की एक हालिया रिसर्च में सामने आया है कि किशोरियों में मोटापा, लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी पीसीओएस तेजी से बढ़ रहा है। एम्स के विशेषज्ञों ने बेहतर पोषण, शारीरिक गतिविधि और डिजिटल स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया है। यह अध्ययन पिछले तीन साल से चल रहा है और आगे भी जारी है।
एम्स नई दिल्ली के पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजी विभाग की प्रोफेसर रजनी शर्मा ने बताया कि संस्थान ने एक एनजीओ के साथ मिलकर स्कूली छात्रों की स्क्रीनिंग की है। प्राइवेट स्कूलों में 40 से 45 प्रतिशत तक लड़कियां मोटी या ओवरवेट हैं। वहीं सरकारी स्कूलों में भी यह आंकड़ा 15 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
एम्स के मनोरोग विभाग की बाल मनोवैज्ञानिक रेनू शर्मा ने बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर ज्यादा स्क्रीन टाइम के बुरे असर की बात कही है। अत्यधिक स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया के इस्तेमाल से बच्चों में तनाव, मोटापा और व्यवहार से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम की सीमा तय करना बेहद जरूरी है।