AIIMS दिल्ली के डॉक्टरों का कमाल: 4 साल के बच्चे जैसी कद-काठी वाली महिला का किया दुर्लभ ऑपरेशन

देश के प्रतिष्ठित संस्थान AIIMS New Delhi के डॉक्टरों ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहां की एक मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने एक 44 वर्षीय महिला का बेहद जटिल और दुर्लभ 'की-होल' (लैप्रोस्कोपिक) हिस्टेरेक्टॉमी ऑपरेशन सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। यह मामला इसलिए चुनौतीपूर्ण था क्योंकि मरीज की शारीरिक स्थिति सामान्य वयस्कों से बिल्कुल अलग थी।
मरीज महिला की लंबाई महज 98 सेंटीमीटर और वजन केवल 22 किलोग्राम था, जो लगभग एक 4 साल के बच्चे के बराबर है। इसके अलावा वह गंभीर ऑस्टियोपोरोसिस से भी जूझ रही थीं। महिला को एंडोमेट्रियोसिस और एडेनोमायोसिस के कारण पेल्विक हिस्से में असहनीय दर्द हो रहा था, जिसके चलते सर्जरी अनिवार्य हो गई थी। हालांकि, उनकी नाजुक स्थिति के कारण फ्रैक्चर और एयरवे (सांस की नली) से जुड़ी गंभीर जटिलताओं का बड़ा खतरा था।
विशेष तकनीक और सटीक प्लानिंग से मिली सफलता
इस जोखिम भरी सर्जरी को सुरक्षित बनाने के लिए डॉक्टरों ने खास इंतजाम किए। टीम ने मरीज के लिए कस्टमाइज्ड फ्लैट पोजिशनिंग और विशेष पेन मैनेजमेंट का सहारा लिया। पूरी सर्जिकल प्रक्रिया लगभग 90 मिनट में पूरी हुई, जिसमें न्यूनतम चीर-फाड़ (मिनिमल इनवेजन) का इस्तेमाल किया गया। सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी बहुत अच्छी रही और उन्हें तीसरे दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इस सफल ऑपरेशन में गाइनेकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर रीता माहेय, डॉ. स्वाति तोमर और एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. परिन लालवानी व डॉ. चोरो अथिफ्रो कायिना की अहम भूमिका रही। इस पूरी प्रक्रिया को ओबीजीवाईएन विभाग की प्रमुख प्रोफेसर नीना मल्होत्रा और प्रोफेसर के. अपर्णा शर्मा के नेतृत्व में पूरा किया गया।
गौरतलब है कि AIIMS दिल्ली न केवल ऐसे जटिल ऑपरेशन कर रहा है, बल्कि हाल ही में यहां 'सुपर माइक्रोसर्जरी' वर्कशॉप का भी आयोजन किया गया था। इस तकनीक के जरिए 0.8 मिमी से भी छोटी रक्त वाहिकाओं पर काम किया जाता है, जो भविष्य में कैंसर, डायबिटिक फुट अल्सर और माइग्रेन जैसी बीमारियों के इलाज में मील का पत्थर साबित होगी।