AIIMS के विशेषज्ञों ने किशोरियों में बढ़ते मोटापे और पीसीओएस पर जताई चिंता

नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के बाल endocrinology विभाग के विशेषज्ञों ने किशोरों में मोटापे, माहवारी की अनियमितता और पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई है। यह जानकारी ANI के माध्यम से सामने आई है।विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बच्चों में ये स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
AIIMS अध्ययन के आंकड़े
AIIMS ने बुजुर्गों, किशोरों और बच्चों में अंतःस्रावी स्वास्थ्य सोसायटी (Society of Endocrine Health in Elderly, Adolescent, and Children) के साथ मिलकर स्कूलों में स्वास्थ्य जांच की है। सितंबर 2026 के अंत तक के तीन साल के अध्ययन के आंकड़ों से पता चलता है कि प्राइवेट स्कूलों में 40% से 45% लड़कियां ओवरवेट या मोटी हैं, जबकि सरकारी स्कूलों के छात्रों में यह आंकड़ा 15% तक बढ़ा है। लगभग 4,000 किशोरियों के सर्वेक्षण में पाया गया कि हर पांच में से एक लड़की ने माहवारी में अनियमितता की शिकायत की है।
मुख्य कारण और नए नामकरण
जीवनशैली से जुड़े कारक, खासकर अत्यधिक स्क्रीन टाइम, इन स्वास्थ्य जटिलताओं के मुख्य कारण हैं। मई 2026 में, चिकित्सा समुदाय ने PCOS का नाम बदलकर पॉलिसिस्टिक ओवरी एंड मेटाबोलिक सिंड्रोम (PMOS) कर दिया है ताकि मेटाबोलिक स्वास्थ्य पर इसके व्यापक प्रभाव को जोर दिया जा सके। डॉ. वंदना जैन ने बताया किशोरावस्था में शुरुआती दौर में अनियमितता आम है, लेकिन लगातार समस्याओं के लिए चिकित्सीय मूल्यांकन जरूरी है।
निदान और जरूरी कदम
किशोरों में PCOS के निदान के लिए अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के तहत माहवारी की अनियमितता और हाइपरएंड्रोजनम दोनों का होना जरूरी है। केवल एक लक्षण वाले किशोरों को PCOS के जोखिम में माना जाता है और उन्हें लगातार निगरानी की आवश्यकता होती है। मनोवैज्ञानिक रेनू शर्मा ने बेहतर पोषण, शारीरिक गतिविधि और डिजिटल स्वास्थ्य को जरूरी बताया है।