भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को मजबूती देने भारत पहुंचे एडमिरल सैमुअल पापारो

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी को एक नई ऊंचाई देने के लिए अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं। 3 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 तक चलने वाली इस छह दिवसीय यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को गहरा करना और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना है। भारत अमेरिका रक्षा संबंध अब एक ऐसे मोड़ पर हैं जहां दोनों देश न केवल सैन्य सहयोग बल्कि तकनीक और डिजिटल बदलाव पर भी जोर दे रहे हैं।
अपनी यात्रा के दौरान एडमिरल पापारो ने भारत के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं। 4 अक्टूबर को उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की, जिसमें समुद्री सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके बाद 6 अक्टूबर को उन्होंने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के साथ बैठक की, ताकि रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
रणनीतिक चर्चा और सुरक्षा प्राथमिकताएं
7 अक्टूबर को नई दिल्ली के रूजवेल्ट हाउस में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और मोंटाना के गवर्नर ग्रेग गियानफोर्ट भी मौजूद थे। चर्चाओं का केंद्र मुख्य रूप से उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और रक्षा ऊर्जा लचीलेपन (defense energy resilience) जैसे मुद्दे रहे। एडमिरल पापारो ने इस बात पर जोर दिया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती आक्रामकता और दबाव की स्थिति चिंताजनक है, और ऐसी स्थिति में 'शक्ति के माध्यम से शांति' बनाए रखना आवश्यक है।
इस दौरे में भारत के रक्षा प्रमुखों की भूमिका भी अहम रही। एडमिरल पापारो ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमण्यन, आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ, डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल तेजिंदर सिंह के साथ रणनीतिक परामर्श किया।
यह पूरी कवायद दोनों देशों के बीच हुए 10 साल के रक्षा समझौते का हिस्सा है। इसका लक्ष्य सैन्य तालमेल को बढ़ाना और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक एकजुट टीम के रूप में काम करना है, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे।