अदिति फीचर्स 10 अगस्त 2026: प्रार्थना बेहेरे का सफर और अमेरिकी रूस प्रतिबंध विधेयक

Kittu Kumari10 August 20264 min read71 viewsNational
अदिति फीचर्स 10 अगस्त 2026: प्रार्थना बेहेरे का सफर और अमेरिकी रूस प्रतिबंध विधेयक

अदिति फीचर्स (G 75, Lajpat nagar 1, New Delhi- 110024, दिनांक 10 अगस्त 2026, फोन 9312214657, युवराज फीचर्स) द्वारा जारी विभिन्न लेखों और जानकारियों में मराठी फिल्मों की जानी-मानी एक्ट्रेस प्रार्थना बेहेरे के जीवन सफर से लेकर अमेरिकी सीनेट द्वारा पारित नए 'रूस प्रतिबंध विधेयक' तक के महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं। इस अंक में मराठी फिल्मों की 'मुमताज' कही जाने वाली प्रार्थना बेहेरे की अभिनय यात्रा, रूस प्रतिबंध विधेयक और इसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

मराठी फिल्मों की 'मुमताज' प्रार्थना बेहेरे का फिल्मी सफर

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5 जनवरी 1983 को गुजरात के वडोदरा के एक मराठी परिवार में जन्मी हिंदी टेलीविज़न और हिंदी तथा मराठी फिल्मों की जानी मानी एक्ट्रेस प्रार्थना बेहेरे ने महज 16 साल की उम्र में मराठी फिल्म और हिंदी टेलीविजन इंडस्ट्री में बतौर एक्ट्रेस अपने करियर की शुरुआत की। '9 एक्स झकास हीरोइन हंट सीजन 1' की विजेता चुने जाने के बाद प्रार्थना बेहेरे को मराठी फिल्म 'रीटा' (2009) का ऑफर मिला, जिसमें उन्होंने अनुराधा साळवी की शानदार भूमिका निभाते हुए अपनी एक्टिंग पारी शुरू की। जिस वक्त फिल्म 'रीटा' (2009) का दूसरा शूटिंग शैडयूल चल रहा था, प्रार्थना को ज़ी टीवी के शो 'पवित्र रिश्ता' (2009) में वैशाली के किरदार का प्रस्ताव मिला और उन्होंने उसी साल टेलीविजन पर भी डेब्यू किया। 'पवित्र रिश्ता' (2009) में वैशाली के किरदार में हर किसी ने प्रार्थना की खूबसूरती और उनके काम की जमकर तारीफ की, जिससे वह घर घर में लोकप्रिय हो गईं। इसके बाद उन्होंने 'माई लेक' (2010), 'जय महाराष्ट्र ढाबा भटिंडा' (2013), 'मितवा' (2015), 'कॉफ़ी आणि बरंच काही' (2015), 'वक्रतुंड महाकाय' (2015), 'मिस्टर एंड मिसेज़ सदाचारी' (2016), और 'फुगे' (2017) जैसी व्यावसायिक रूप से सफल फिल्मों में काम किया। हिंदी फिल्मों की फेमस एक्ट्रेस मुमताज की शक्लो सूरत से काफी मिलती जुलती प्रार्थना बेहेरे को मराठी फिल्म जगत की मुमताज के तौर पर जाना जाता है। प्रार्थना ने फिल्म 'लव यू... मिस्टर कलाकार!' (2011) से बॉलीवुड में डेब्यू किया और सलमान खान अभिनीत फिल्म 'बॉडीगार्ड' (2011) में एक स्पेशल अपीरियंस निभाई। नवंबर 2017 में प्रार्थना बेहेरे ने फिल्म निर्देशक और लेखक अभिषेक जवकर से गोवा में शादी रचा ली, जिसके बाद उन्होंने 'लग्न मुबारक' (2018), 'स्माइल प्लीज' (2019), 'ती अँड ती' (2019) 'रंजीत' (2024) और 'अंबट शौकीन' (2025) जैसी फिल्मों तथा 'मीटर डाउन' (2021-2022) और 'माझी तुझी रेशीमगाठ' (2021-2023) जैसे टीवी सीरियल्स में काम करना जारी रखा। ज़ी मराठी के शो 'माझी तुझी रेशीमगाठ' (2021-2023) में नेहा कामत जो दूसरी शादी के बाद नेहा चौधरी बन जाती है, इस मुख्य किरदार में प्रार्थना की एक्टिंग ने 'पवित्र रिश्ता' के वैशाली करंजकर के किरदार की प्रसिद्धि को पीछे छोड़ दिया। प्रार्थना बेहेरे इस वक्त कलर्स मराठी के एक टीवी सीरियल के अलावा मराठी फिल्म 'मर्दिनी', 'सूतक' और 'कधी प्रेम कधी गोंधळ' की शूटिंग में बिजी हैं।

रूस प्रतिबंध विधेयक और भारत पर इसके संभावित प्रभाव

कमलेश पांडेय (वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक) के अनुसार, अमेरिकी सीनेट द्वारा पारित नए 'रूस प्रतिबंध विधेयक' ने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है क्योंकि यह विधेयक रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का आयात करने वाले शीर्ष देशों, जिनमें भारत और चीन शामिल हैं, पर सौ प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान करता है। अमेरिकी सीनेट के इस कदम ने भारत-अमेरिका के भावी रिश्तों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। यह सवाल उठता है कि अमेरिकी सीनेट द्वारा पारित नए 'रूस प्रतिबंध विधेयक' क्या हैं, इससे कौन कौन देश प्रभावित होंगे और इससे भारतीय गुटनिरपेक्षता का क्या हश्र होगा। यह विधेयक भारत के लिए केवल रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों का मामला नहीं है, बल्कि इसका बड़ा प्रश्न यह है कि क्या अमेरिका अब तीसरे देशों की विदेश एवं ऊर्जा नीति को भी अपने प्रतिबंधों के जरिए प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी सीनेट ने गत 7 अगस्त 2026 को रूस प्रतिबंध विधेयक 86–11 से पारित किया है लेकिन यह अभी कानून नहीं बना है और इसे प्रतिनिधि सभा से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी भी चाहिए। इस नए विधेयक का नाम “Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026” है, जिसके मुख्य प्रावधानों में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और रूसी नेतृत्व पर अतिरिक्त प्रतिबंध, रूसी वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा परियोजनाओं और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले “shadow fleet” पर कार्रवाई, तथा रूस की तेल-गैस आय को कम करने के लिए उसके बड़े खरीदारों पर दबाव शामिल हैं। इसका सबसे विवादास्पद प्रावधान यह है कि राष्ट्रपति को रूस के तेल/गैस के शीर्ष पांच खरीदार देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार सौंप दिया गया है, जबकि पुराने प्रारूप में 500% तक टैरिफ की चर्चा थी जिसे जुलाई में संशोधित संस्करण में 100% किया गया और राष्ट्रपति को अधिक विवेकाधिकार दिया गया।

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