जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों की हिरासत, असम जातीय परिषद ने जताया कड़ा रोष

Kittu Kumari3 October 20262 min read0 viewsNational
जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों की हिरासत, असम जातीय परिषद ने जताया कड़ा रोष

नई दिल्ली के जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इस कार्रवाई के बाद असम जातीय परिषद (AJP) ने गहरी नाराजगी जताई है। शनिवार को हुई इस कार्रवाई में AJP के संयुक्त सचिव कुनकी चौधरी के साथ-साथ वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव और कई अन्य प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने अपनी गिरफ्त में लिया।

दरअसल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ लोग जंतर मंतर पर जुटे थे। दिल्ली पुलिस ने बताया कि शनिवार को इस सभा के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी, जिसके कारण भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी। इसी का हवाला देते हुए पुलिस ने लगभग 150 से 160 लोगों को हिरासत में लिया।

भारी पुलिस बल की कार्रवाई और नेताओं की प्रतिक्रिया

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यह तनाव शुक्रवार से ही शुरू हो गया था, जब 2 अक्टूबर को करीब 1,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था और पुलिस ने ड्यूटी में बाधा डालने के आरोप में तीन FIR दर्ज की थीं। शनिवार की कार्रवाई में राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज जैसे प्रमुख चेहरे भी शामिल थे।

असम जातीय परिषद के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई और महासचिव जगदीश भुयान ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि राज्य को शांतिपूर्ण सभा करने के संवैधानिक अधिकार और चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का सम्मान करना चाहिए।

दूसरी ओर, हिरासत से छूटने के बाद योगेंद्र यादव ने साफ कर दिया कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त के महाभियोग की मांग को जारी रखेंगे और रविवार, 4 अक्टूबर को फिर से मार्च निकालेंगे। प्रशांत भूषण ने कहा कि इस तरह के दमन से जनता की आवाज नहीं दबेगी, वहीं नेहा बोरा ने प्रदर्शनकारियों से डटकर मुकाबला करने की अपील की है।

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