आईआईटी दिल्ली में आचार्य प्रशांत ने छात्रों को समझाया: डिग्री और पैकेज नहीं, जीवन का उद्देश्य खोजें

आईआईटी दिल्ली के डोगरा हॉल में आयोजित एक विशेष सेमिनार में आचार्य प्रशांत ने छात्रों के साथ करियर, तनाव और जीवन के असली मकसद पर चर्चा की। 'एम्पॉवरिंग एनकाउंटर्स' पहल के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का शीर्षक "द इल्यूजन ऑफ डिग्रीज एंड पैकेज" (डिग्रियों और पैकेज का भ्रम) था। इस सत्र में न केवल आईआईटी दिल्ली, बल्कि आईआईटी मद्रास और दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र भी शामिल हुए। हॉल की क्षमता कम होने के कारण हजारों अन्य छात्र इस चर्चा को लाइव स्ट्रीम के जरिए देख रहे थे।
इस कार्यक्रम का आयोजन नेशनल रिसोर्स सेंटर फॉर वैल्यू एजुकेशन इन इंजीनियरिंग (NRCVEE) के सहयोग से किया गया था, जिसमें मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर भूपिंदर गोदारा भी मौजूद रहे।
तनाव की असली वजह पढ़ाई नहीं, उद्देश्य की कमी है
सेमिनार के दौरान छात्रों ने सीजीपीए (CGPA), करियर के दबाव, डिप्रेशन और भारी-भरकम सैलरी पैकेज की होड़ जैसे गंभीर मुद्दों पर अपने सवाल रखे। आचार्य प्रशांत ने इन चिंताओं का जवाब देते हुए कहा कि छात्रों में तनाव का मुख्य कारण अकादमिक बोझ नहीं, बल्कि जीवन में एक स्पष्ट उद्देश्य की कमी है। उन्होंने आधुनिक शिक्षा के साथ आध्यात्मिक ज्ञान के समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों को एक संतुलन बनाना चाहिए, जहां वे सुबह 'कंप्यूटर साइंस' पढ़ सकते हैं और शाम को 'उपनिषदों' का अध्ययन कर सकते हैं।
गांधी जयंती से पहले आयोजित इस सत्र में उन्होंने अहिंसा की एक नई व्याख्या भी पेश की। उन्होंने कहा कि खुद के साथ हिंसा न करना ही असली अहिंसा है और झूठ के खिलाफ विद्रोह करना ही परम सत्य है। गौरतलब है कि आईआईटी दिल्ली एलुम्नाई एसोसिएशन पहले भी राष्ट्रीय विकास में उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित कर चुका है। इस कार्यक्रम की चर्चा सोशल मीडिया पर काफी रही, जिसे बाद में विस्तृत रूप से कवर किया गया।