दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के पास आते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अपना प्रचार अभियान बहुत तेज कर दिया है। इस चुनाव में एबीवीपी के कार्यकर्ता अलग-अलग कॉलेजों में जाकर छात्रों से पढ़ाई और उनकी उम्मीदों को लेकर सीधी बात कर रहे हैं। इस बार एबीवीपी के पैनल में अध्यक्ष पद के लिए यश डबास, उपाध्यक्ष पद के लिए इशू मौर्य, सचिव पद के लिए रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद के लिए लक्षिराज सिंह मैदान में हैं।
इन सभी उम्मीदवारों को क्रमशः 7, 3, 3 और 3 बैलेट नंबर मिले हैं। एबीवीपी के दिल्ली राज्य सचिव सार्थक शर्मा ने कहा है कि छात्र जमीन पर काम करने के कारण एबीवीपी को ही सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। सार्थक शर्मा ने कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन एनएसयूआई पर झूठ बोलने, परिवारवाद और अवसरवाद का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस के एक बड़े नेता के रिश्तेदार को टिकट मिलने के कारण बागी उम्मीदवार नाराज होकर विरोध कर रहे हैं।
डीयू में छात्रसंघ के चुनाव साल 1954 से हो रहे हैं और एबीवीपी ने इसमें 1971 से हिस्सा लेना शुरू किया था। साल 1973 में जब पहली बार सीधा चुनाव हुआ था, तब एबीवीपी ने चारों पदों पर जीत हासिल की थी। साल 2010 से लेकर अब तक हुए 13 चुनावों में से 9 बार एबीवीपी ने अध्यक्ष पद पर कब्जा किया है। संगठन का कहना है कि वे साल भर सक्रिय रहते हैं और उन्होंने डीयू में पीजी सीटों को लगभग दोगुना करने, यू-स्पेशल बस सेवा शुरू करने, हॉस्टल आवंटन को एक जगह से करने जैसे कई काम किए हैं।
संगठन ने परिसरों में सुरक्षा के लिए पिंक बूथ और वामिका वैन शुरू करने के साथ ही बुनियादी ढांचे का विकास भी किया है। इसके अलावा, ग्रेट डीयू इंटर्नशिप के जरिए लगभग 7,000 छात्रों और कानून की इंटर्नशिप के जरिए 1,000 छात्रों को ट्रेनिंग दी गई है। एबीवीपी का यह भी कहना है कि वे छात्रों की समस्याओं को हल करने को प्राथमिकता देते हैं और छात्र आंदोलनों को पार्टी की राजनीति से अलग रखते हैं।