'हिरासत पूरी तरह अवैध और असंवैधानिक', प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भड़के अभिषेक मनु सिंघवी

देश की राजधानी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कड़ा प्रहार किया है। सिंघवी ने प्रशासन के इस कदम को पूरी तरह से 'अवैध और असंवैधानिक' करार देते हुए इसे शांतिपूर्ण सभा करने के मौलिक अधिकार का खुला उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि जब प्रदर्शनकारियों ने कुछ गलत किया ही नहीं, तो उन्हें हिरासत में लेने का सवाल ही नहीं उठता।
सिंघवी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये सभी 'निवारक हिरासत' (Preventive Detentions) हैं, जो किसी घटना के होने से पहले ही ले ली गईं। उन्होंने हैरानी जताई कि किसी व्यक्ति को गुरुग्राम से उठाया गया तो किसी को विमान से ही पकड़ लिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना एक बुनियादी अधिकार है और तथाकथित 'विशेष सुरक्षा उपायों' के नाम पर इस अधिकार को छीना नहीं जा सकता।
लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए था प्रदर्शन
प्रदर्शन मार्च के उद्देश्यों पर स्पष्टीकरण देते हुए सिंघवी ने कहा कि इस आयोजन का मकसद देश की संवैधानिक संस्थाओं के सामने लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाना था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस विरोध प्रदर्शन के पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं थी और न ही इसका उद्देश्य न्यायपालिका को निशाना बनाना था। उन्होंने कहा, "हम केवल राज्य के महत्वपूर्ण अंगों का ध्यान उन बातों की ओर खींचना चाहते हैं, जो हमारे लोकतंत्र की बुनियाद को प्रभावित कर रही हैं।"
गौरतलब है कि दिल्ली और एनसीआर के कई हिस्सों में पुलिस ने भारी सुरक्षा इंतजाम किए थे ताकि प्रदर्शनकारी हाई-सिक्योरिटी जोन की ओर न बढ़ सकें। इसी बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी युवाओं और नागरिक समाज से एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट मार्च करने की अपील की थी। उन्होंने 'डरो मत' का नारा देते हुए कहा कि पूरा भारत लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए साथ चलेगा।
इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा किया गया था, जिसके बाद पुलिस ने बड़े पैमाने पर हिरासत की कार्रवाई की। हालांकि, बाद में कुछ कार्यकर्ताओं को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के बाद रिहा कर दिया गया, लेकिन कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि वे इस तरह की गिरफ्तारियों से डरने वाले नहीं हैं।