'आपको बहुत ताकतवर महसूस हो रहा होगा', सौरव और आशुतोष की हिरासत बढ़ने पर अभिजित दिपके ने पीएम मोदी पर साधा निशाना

Kittu Kumari19 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
'आपको बहुत ताकतवर महसूस हो रहा होगा', सौरव और आशुतोष की हिरासत बढ़ने पर अभिजित दिपके ने पीएम मोदी पर साधा निशाना

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजित दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। यह प्रतिक्रिया दिल्ली के जंतर मंतर विरोध प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिए गए सौरव दास और आशुतोष रंका की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के बाद आई है। दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए सरकार पर युवा प्रदर्शनकारियों को डराने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।

अभिजित दिपके ने अपने वीडियो में तंज कसते हुए कहा कि 26 वर्षीय सौरव दास को जेल में रखकर और सड़कों पर बच्चों के साथ मारपीट कर, दिल्ली में बैरिकेड्स लगाकर और छात्रों को घसीटकर प्रधानमंत्री को शायद बहुत ताकतवर महसूस हो रहा होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पुलिस और अदालतों के पीछे छिपकर युवाओं को जेल में डालना ही असली ताकत है? दिपके ने भावुक होते हुए कहा कि सौरव और आशुतोष की उम्र पीएम मोदी के पोते-पोतियों जितनी है, ऐसे में उनके खिलाफ पूरी सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

अदालती कार्यवाही और कानूनी अड़चनों पर सवाल

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मामले की गंभीरता पर बात करते हुए दिपके ने दावा किया कि कानूनी कार्यवाही को जानबूझकर स्थगित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सौरव और आशुतोष जंतर मंतर पर तिरंगा फहराने गए थे, जिसके कारण उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। उनके मुताबिक, इसके बाद हर दिन किसी न किसी बहाने सुनवाई को टाला गया।

वहीं, CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने अदालत की कार्यवाही की आलोचना करते हुए इसे 'मजाक' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जमानत के दस्तावेजों में मामूली विसंगतियों का बहाना बनाकर उनकी स्वतंत्रता छीनी जा रही है। सिंह ने कहा कि दोपहर 2 बजे की सुनवाई करीब 3:30 बजे शुरू हुई और बिना किसी ठोस आधार के उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने इसे मानसिक प्रताड़ना और आवाजों को दबाने की कोशिश बताते हुए कहा कि वे इस फैसले को चुनौती देंगे।

वकीलों के अनुसार, सोमवार को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन से उन्हें वापस न्यायिक हिरासत में ले जाया गया क्योंकि उनके जमानतकर्ता (surety) के दस्तावेजों में गड़बड़ी बताई गई थी। बचाव पक्ष के वकील अभिक चिमनी ने भी इस फैसले पर निराशा व्यक्त की है।

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