सीमा सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए, विरोध प्रदर्शन दबाना नहीं: अभिजीत दिपके का पीएम मोदी पर हमला

CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को विरोध प्रदर्शन दबाने के बजाय सीमा सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।

Kittu Kumari23 October 20262 min read0 viewsNational
सीमा सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए, विरोध प्रदर्शन दबाना नहीं: अभिजीत दिपके का पीएम मोदी पर हमला

देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा प्रबंधन को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दिपके का आरोप है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता कर रही है क्योंकि जिस सुरक्षा बल को सीमाओं की रक्षा करनी चाहिए, उन्हें देश के भीतर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए तैनात किया जा रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि दिल्ली को अपने ही नागरिकों के खिलाफ एक 'किले' में बदलना राष्ट्रीय रक्षा को कमजोर करता है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लेते हुए लिखा कि सुरक्षा बलों का इस्तेमाल अपने ही देशवासियों के खिलाफ करना राष्ट्रीय सुरक्षा को जोखिम में डालने जैसा है। उनके मुताबिक, सरकार की प्राथमिकता सीमाओं को सुरक्षित करना होना चाहिए, न कि प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए दिल्ली की घेराबंदी करना।

चीन सीमा विवाद और विपक्ष के गंभीर आरोप

यह विवाद उस समय और गहरा गया जब कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी केंद्र सरकार पर चीन के मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। रमेश ने दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश में गश्त बिंदुओं (patrolling points) को लेकर भारत को नुकसान हुआ है और प्रधानमंत्री तथा उनका प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर चुप है। उन्होंने आईटीबीपी (ITBP) के महानिदेशक द्वारा पीएलए (PLA) के साथ हालिया मुठभेड़ों में बल के प्रदर्शन की तारीफ का जिक्र करते हुए सरकार की 'कैलिब्रेटेड रियायतों' पर सवाल उठाए।

वहीं, शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री से चीन के प्रति भारत के दृष्टिकोण पर स्पष्टीकरण मांगा। प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि एक तरफ संबंधों को सामान्य बनाने की बात की जाती है, लेकिन दूसरी तरफ सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर लगातार विरोधाभासी संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय हित और सुरक्षा के मामले में जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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