अभिजीत दिपके की हिरासत के 8 घंटे बाद भी ठिकाना अज्ञात, CJP ने उठाए सवाल

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दिपके की हिरासत को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया है। पार्टी का आरोप है कि अभिजीत को हिरासत में लिए हुए आठ घंटे से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस अब तक यह नहीं बता पाई है कि उन्हें कहां रखा गया है। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने कहा कि न तो उनके वकीलों और न ही पार्टी की टीम को हिरासत के कारणों की जानकारी दी गई है।
अजिंक्य शिंदे ने मीडिया को बताया कि जब पार्टी के प्रतिनिधि उन्हें खोजने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो वहां से यह जवाब मिला कि अभिजीत वहां नहीं हैं। पुलिस ने उन्हें उस इलाके के थाने में संपर्क करने की सलाह दी जहां से उन्हें उठाया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। शिंदे ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस उन्हें किसी वकील या टीम से बात नहीं करने दे रही है।
निवारक हिरासत का आरोप और विरोध प्रदर्शन
इस मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनिश गावंडे ने भी हस्तक्षेप किया है। उन्होंने दावा किया कि अभिजीत दिपके को संभवतः निवारक हिरासत (Preventive Detention) में रखा गया है। गावंडे के मुताबिक, अभिजीत केवल तिरंगा लेकर चल रहे थे और उन्होंने पुलिस से वैकल्पिक स्थान के बारे में भी पूछा था, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने कहा कि तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है और उनकी रिहाई की मांग की है।
दरअसल, यह पूरा मामला CJP द्वारा कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आयोजित "लेहरा दो तिरंगा" विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं के विरोध में निकाला जाना था। दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा आदेश लागू करते हुए अभिजीत दिपके को उनके निवास से हिरासत में लिया था।
इस प्रदर्शन के दौरान केवल अभिजीत ही नहीं, बल्कि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा समेत 150 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर सेंट्रल पार्क को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया था और वहां भारी पुलिस बल व अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी।