अभिजीत दिपके को अज्ञात स्थान पर ले गई दिल्ली पुलिस, CJP ने लगाया वकील से न मिलने देने का आरोप

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर पुलिसिया कार्रवाई और मानवाधिकारों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि दिल्ली पुलिस ने उनके सदस्य अभिजीत दिपके को हिरासत में लेकर एक अज्ञात स्थान पर रखा है। पार्टी का दावा है कि उनके सहयोगी अभिजीत के संपर्क में नहीं हैं और उन्हें उनके कानूनी सलाहकारों या वकीलों से बात करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए CJP ने पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि जब अभिजीत दिपके को उनके घर से ले जाया गया, तब उनके हाथ में तिरंगा झंडा था। पार्टी ने सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या तिरंगा लेकर चलना कोई अपराध है और युवाओं के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे भारत के समान नागरिक हैं और उन्हें संविधान द्वारा दिए गए सभी अधिकारों और सुरक्षा का हक है।
'लेहरा दो तिरंगा' मार्च के दौरान हुई कार्रवाई
यह पूरा मामला CJP द्वारा कॉनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आयोजित किए जाने वाले 'लेहरा दो तिरंगा' विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मतदाता सूचियों और चुनावी रोल में कथित अनियमितताओं के विरोध में निकाला जाना था। पुलिस ने एहतियातन कार्रवाई करते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निरोधात्मक हिरासत (Preventive Detention) का हवाला देकर अभिजीत दिपके को उनके आवास से हिरासत में लिया।
सिर्फ अभिजीत ही नहीं, बल्कि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कई अन्य कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने पकड़ा। इनमें AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल हैं, जिन्हें मंडी हाउस के पास से हिरासत में लिया गया। खबरों के मुताबिक, कुल 150 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। सुरक्षा के मद्देनजर सेंट्रल पार्क को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया था और वहां भारी बैरिकेडिंग के साथ अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। फिलहाल, इन गंभीर आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।