CJP एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके की हुंकार, हिरासत और निजी दुख के बाद भी जारी रहेगा प्रदर्शन

दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दिपके ने साफ कर दिया है कि न तो पुलिस की हिरासत और न ही निजी जीवन का कोई बड़ा दुख उन्हें अपने हक की लड़ाई से पीछे हटने पर मजबूर करेगा। दिल्ली पुलिस द्वारा प्रिवेंटिव डिटेंशन से रिहा होने के बाद दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ऐलान किया है कि वे दोबारा सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसा कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है जो उन्हें विरोध प्रदर्शन से रोके।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब 10 अक्टूबर 2026 को अभिजीत दिपके, सौरभ दास और आशुतोष रंका मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने की योजना बना रहे थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। 11 अक्टूबर को उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां 50,000 रुपये के मुचलके और एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर उन्हें रिहा किया गया। CJP ने इस रिहाई को अपनी एक बड़ी कानूनी जीत बताया है।
पारिवारिक शोक और पुलिस पर विवाद
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अभिजीत दिपके के लिए एक बेहद दुखद खबर भी आई। 10 अक्टूबर को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में उनकी 85 वर्षीय दादी, सावित्रीबाई शंकरराव दिपके का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। 11 अक्टूबर को उनका अंतिम संस्कार किया गया, लेकिन अभिजीत इस मौके पर मौजूद नहीं रह सके।
अब इस बात को लेकर विवाद खड़ा हो गया है कि अभिजीत को रिहा करने में देरी क्यों की गई। उनके चाचा विलास दिपके का आरोप है कि पुलिस ने उनकी कई विनतियों के बावजूद अभिजीत को समय पर रिहा नहीं किया, जिससे वे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का दावा है कि उन्होंने संवेदनशीलता के साथ अभिजीत को उनकी दादी के निधन की सूचना दी थी और यात्रा के लिए मदद की पेशकश भी की थी, जिसे अभिजीत ने ठुकरा दिया।
बता दें कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं के खिलाफ इस विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था। 10 अक्टूबर को हजारों पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई और करीब 2,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए प्रशासन को बैरिकेडिंग की समीक्षा करने और केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत ही शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने मेट्रो, रेलवे और इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने का भी आदेश दिया। संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानवाधिकार निकाय ने भी दिल्ली में हुए इन सामूहिक डिटेंशन पर चिंता जताई है।