"वर्दी में गुंडे हैं दिल्ली पुलिस", हिरासत में प्रताड़ना का आरोप लगाकर गरजे CJP नेता अभिजीत डिपके

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक्टिविस्ट अभिजीत डिपके ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हिरासत के दौरान हुए व्यवहार को अमानवीय और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए डिपके ने पुलिस प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पुलिसकर्मियों को 'वर्दी में गुंडे' और 'लुटेरे' करार दिया। अपनी रिहाई के बाद नागपुर पहुंचे डिपके ने कहा कि वह किसी भी तरह की धमकी से डरने वाले नहीं हैं और सरकार उन्हें सौ बार भी जेल भेजे, तो भी वह पीछे नहीं हटेंगे।
अभिजीत डिपके, आशुतोष रंका और सौरव दास को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के बाद रिहा किया गया। CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने जानकारी दी कि उन्हें एक साल तक शांति भंग न करने की शर्त पर छोड़ा गया है। हालांकि, रिहाई के बाद मीडिया से बात करते हुए डिपके ने सीधे तौर पर गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "इन लोगों में कोई इंसानियत नहीं बची है। अमित शाह ने पुलिस को गुंडों में बदल दिया है। हमने कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है और हम फिर से सड़कों पर उतरेंगे। हम इस तानाशाही को खत्म करेंगे।"
दादी की मौत के समय फोन तक नहीं दिया: अमानवीयता का आरोप
अभिजीत डिपके ने अपनी हिरासत के दौरान एक बेहद भावुक और दर्दनाक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह हिरासत में थे, तभी उनकी 85 वर्षीय दादी सावित्रीबाई शंकरराव डिपके का निधन हो गया। डिपके का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें इस दुख की घड़ी में बुनियादी संचार अधिकारों से वंचित रखा।
- फोन की मांग ठुकराई: डिपके के अनुसार, जब पुलिस ने उन्हें दादी की मौत की खबर दी, तो उन्होंने अपने चचेरे भाई को फोन करने के लिए दो मिनट के लिए फोन मांगा, लेकिन पुलिस ने इनकार कर दिया।
- वकील से बात नहीं करने दी: उन्होंने आरोप लगाया कि कानूनन उन्हें अपने वकील से बात करने का अधिकार था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी।
- आधी रात को कॉल का दबाव: डिपके ने बताया कि पुलिस ने उन्हें सुबह 3:30 बजे जगाया और अपने माता-पिता को फोन कर गिरफ्तारी की सूचना देने के लिए मजबूर किया, जबकि उनके माता-पिता पहले से ही दादी की मौत के सदमे में थे।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया है। डीसीपी नेहा यादव ने कहा कि पुलिस ने मानवीय आधार पर अभिजीत डिपके को उनकी दादी के निधन की सूचना दी और उन्हें उनके गृहनगर जाने के लिए हर संभव मदद की पेशकश की। पुलिस का दावा है कि उनसे बार-बार पूछा गया कि क्या वह अपने माता-पिता से बात करना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
बता दें कि यह पूरा विवाद शनिवार को जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ, जहां पुलिस ने भारी तैनाती की थी और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था।