आस्था कुंज पार्क: गैंगरेप के एक महीने बाद भी सुरक्षा में बड़ी चूक, अंधेरे में डूबे कई इलाके
दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में गैंगरेप के एक महीने बाद भी सुरक्षा में बड़ी खामियां मिली हैं। अंधेरे इलाके और गार्ड्स की कमी अब भी बनी हुई है।

दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 21 सितंबर 2026 को एक 17 साल की लड़की के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। इस खौफनाक वारदात के एक महीने बाद भी हालात जस के तस नजर आ रहे हैं। गुरुवार, 22 अक्टूबर को जब पार्क का औचक निरीक्षण किया गया, तो वहां सुरक्षा की गंभीर खामियां सामने आईं। अधिकारियों के बड़े-बड़े दावों के उलट, पार्क के कई हिस्सों में अब भी अंधेरा है और एंट्री गेट्स पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती न के बराबर है।
निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि गार्ड पोस्ट लॉक पड़े थे और गेट्स पर कोई पहरेदार मौजूद नहीं था। हालांकि, कुछ बदलाव भी दिखे हैं। कुछ रास्तों पर लाइटें जल रही थीं और पुलिस पेट्रोलिंग भी सक्रिय दिखी, जिससे किरण चौहान जैसे कुछ आगंतुकों ने खुद को सुरक्षित महसूस किया। लेकिन अरविंद मौर्य जैसे अन्य लोगों का कहना है कि जब तक प्रवेश द्वारों पर ठोस सुरक्षा नहीं होगी, डर बना रहेगा।
DDA और MCD का सुरक्षा प्लान: क्या होगा असर?
इस पार्क का प्रबंधन दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के पास है। DDA वर्तमान में अपने अधिकार क्षेत्र के 736 पार्कों का सुरक्षा ऑडिट कर रहा है, जिसमें से 190 पार्कों को 'हाई-रिस्क' यानी उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। योजना के मुताबिक, 323 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और 134 संवेदनशील साइटों पर सशस्त्र गार्ड तैनात किए जाएंगे।
दूसरी ओर, दिल्ली नगर निगम (MCD) ने भी 200 पार्कों की पहचान की है जहां सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। इसमें शिफ्ट के आधार पर चौबीस घंटे पेट्रोलिंग और इंडियन रोड कांग्रेस के मानकों के अनुसार लाइटिंग को अपग्रेड करना शामिल है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने महिला सुरक्षा अभियान के तहत सेंट्रल रेंज में 24 सितंबर तक 379 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है। जॉइंट सीपी (सेंट्रल) मधुर वर्मा ने कहा कि यह एक निरंतर चलने वाला कार्यक्रम है ताकि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों का भरोसा वापस लौट सके।
इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार की मांग केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि छात्र भी कर रहे हैं। लेडी श्री राम कॉलेज की छात्राओं ने पहले भी विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें उन्होंने केवल प्रवेश पर पाबंदी लगाने के बजाय सिस्टम में बुनियादी बदलाव की मांग की थी। इस बीच, उपराज्यपाल ने MCD और DDA को निर्देश दिए हैं कि पार्कों के रखरखाव और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और निजी संस्थाओं के साथ साझेदारी की जाए।