आस्था कुंज गैंगरेप केस: कोर्ट ने CCTV फुटेज की मांग ठुकराई, आरोपियों की हिरासत बढ़ाई

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने आस्था कुंज गैंगरेप मामले में बचाव पक्ष की उस अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें आरोपियों के घर के बाहर लगे CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की गई थी। 8 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान स्पेशल POCSO जज स्वाति शर्मा ने न केवल इस याचिका को नामंजूर किया, बल्कि मामले के तीनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत को अगले 14 दिनों के लिए बढ़ा दिया।
इस मामले में आरोपी हेमंत (31), मुकेश (24) और आसिफ (31) कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। सीनियर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर वसी उर रहमान चौधरी ने दलील दी कि जांच अभी जारी है, इसलिए आरोपियों को हिरासत में रखना जरूरी है। वहीं, जांच अधिकारी ने कोर्ट से समय मांगा ताकि आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDRs) की गहनता से जांच की जा सके।
कौन हैं आरोपी और क्या है पूरा मामला?
यह दिल दहला देने वाली वारदात 21 सितंबर 2026 को हुई थी, जब एक 17 साल की नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप किया गया। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें आसिफ शामिल है, जो तुगलकाबाद में प्याज का थोक व्यापारी है। आसिफ को 22 सितंबर को एक पुलिस मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया, जहां उसने पुलिस टीम पर हमला करने की कोशिश की थी।
वहीं, हेमंत खुद को साकेत कोर्ट का वकील बताता है और उसका भाई मुकेश हरियाणा के पलवल का रहने वाला एक बी.एससी छात्र है। इन दोनों को भी पुलिस ने जल्द ही दबोच लिया था। यह मामला बेहद गंभीर है, इसलिए आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ POCSO एक्ट की धारा 6 और 17 के तहत केस चलाया जा रहा है।
इस घटना के बाद इलाके में काफी तनाव देखा गया था। वारदात की जगह के करीब होने के कारण लेडी श्री राम कॉलेज फॉर विमेन ने छात्राओं की सुरक्षा के मद्देनजर कुछ समय के लिए ऑनलाइन क्लासेस शुरू कर दी थीं। दूसरी ओर, आस्था कुंज पार्क की देखरेख करने वाले दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने स्वीकार किया है कि पार्क के बड़े आकार की वजह से सुरक्षा एक चुनौती है और अब वे वहां निगरानी और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा कर रहे हैं।