आप सांसद संजय सिंह ने एसआईआर प्रक्रिया को बताया चुनावी लूट, पिछले सभी चुनाव रद्द करने की मांग की

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने बुधवार को The Indian Express की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए एसआईआर प्रक्रिया को चुनावी लूट करार दिया है। संजय सिंह ने दावा किया कि इस रिपोर्ट के अनुसार दो चुनाव आयुक्तों ने एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर 14 बार असहमति जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार ने एकतरफा फैसले लिए और केंद्रीयकृत प्रणाली के जरिए वोटों को जोड़ा या हटाया गया।
एसआईआर के आंकड़े और नेताओं के नाम हटाने के आरोप
संजय सिंह ने एसआईआर प्रक्रिया के आंकड़े रखते हुए कहा कि 60 लाख नाम हटाए गए, 33 लाख नाम जोड़े गए और 27 लाख नाम लंबित रखे गए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में पूर्व सेना प्रमुख, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, कपिल सिब्बल, एस. जयशंकर और खुद चुनाव आयुक्त श्री संधू तक के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। उन्होंने फॉर्म 6 की प्रक्रिया को भी जटिल बनाने का आरोप लगाया।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप और चुनाव रद्द करने की मांग
संजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार को गिरफ्तार करने की मांग की और कहा कि उनकी देखरेख में देश में कोई भी चुनाव निष्पक्ष नहीं हो सकता। उन्होंने मांग की कि बिहार, बंगाल, दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र समेत अब तक हुए सभी चुनावों को रद्द किया जाए और नए सिरे से चुनाव कराए जाएं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
अन्य विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार और भाजपा वोट देने के अधिकार को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। इससे पहले राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव, अभिषेक बनर्जी और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस मामले पर चिंता जताई थी। दूसरी ओर चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से सर्वसम्मति से लिए गए थे।