आप (AAP) इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल नहीं होगी, सांसद संजय सिंह का बड़ा बयान

नई दिल्ली में बुधवार को होने वाली इंडिया (INDIA) ब्लॉक की समन्वय बैठक से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी इस बैठक में शामिल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि चूंकि आप (AAP) इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, इसलिए इस बैठक में शामिल होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। हालांकि, उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दे को एक राष्ट्रीय मुद्दा बताया और 2 अक्टूबर को होने वाले विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने की अपील की। संजय सिंह ने कहा कि जो लोग चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ बैठते हैं वे शिकायतें उठा रहे हैं और सीजेपी (CJP) के 2 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन का सभी राजनीतिक दलों को समर्थन करना चाहिए।
इंडिया गठबंधन की बैठक में इन मुद्दों पर होगी चर्चा
नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी इंडिया ब्लॉक की समन्वय बैठक के लिए पहुंचे। इस बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। एनसीपी-एससीपी (NCP-SCP) नेता जितेंद्र आव्हाड भी पहुंचे और कहा कि बैठक में संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज को लेकर चिंताओं पर चर्चा होगी। आव्हाड ने आरोप लगाया कि जिस तरह से ज्ञानेश कुमार ने भारत के संविधान को कुचला है और बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के मूल्यों को खत्म करने की कोशिश की है, उस पर चर्चा होगी और साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इंडिया गठबंधन में सब ठीक है।
सीपीआई (CPI) और बीजेपी की प्रतिक्रिया
सीपीआई (CPI) सांसद पी संतोष ने पहले कहा था कि गठबंधन के साथी एसआईआर (SIR) और चुनाव आयोग पर अपनी आगे की कार्रवाई पर चर्चा करेंगे और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की। संतोष ने कहा कि वर्तमान भारतीय राजनीतिक स्थिति में यह बैठक बहुत महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा सांसद भोला सिंह ने कहा कि विपक्ष सत्ता की लालसा से प्रेरित है और प्रधानमंत्री की बढ़ती लोकप्रियता को देखकर घबराहट की स्थिति में है। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने वास्तव में चुनाव में धांधली की होती, तो कांग्रेस हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना या कर्नाटक में सरकारें नहीं बनाती और न ही उन्हें 100 सांसद सीटें मिलतीं।