AAP की बड़ी मांग: ओडिशा के सुंदरगढ़ में आदिवासी जमीन अधिग्रहण तुरंत रोकें सरकारें

Kittu Kumari8 August 20262 min read27 viewsNational
AAP की बड़ी मांग: ओडिशा के सुंदरगढ़ में आदिवासी जमीन अधिग्रहण तुरंत रोकें सरकारें

आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र और राज्य सरकारों से ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में आदिवासी जमीनों के अधिग्रहण की प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि सुंदरगढ़ में डालमिया सीमेंट के विस्तार के लिए लगभग 950 एकड़ आदिवासी जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है, जो ग्राम सभाओं की सहमति के बिना हो रहा है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए Hindusthan Samachar की रिपोर्ट देखी जा सकती है।

संजय सिंह ने उठाए गंभीर सवाल

AAP के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह बात कही। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया 'पंचायतों (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम' (PESA) के प्रावधानों का उल्लंघन करती है, जिसके तहत अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के लिए संबंधित ग्राम सभाओं की पूर्व सहमति अनिवार्य है। संजय सिंह ने कहा कि सुंदरगढ़ के कई गांवों में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और उन्होंने इसे संसद में उठाने के लिए नोटिस भी दिया है, साथ ही अधिग्रहण को तुरंत रोकने और प्रभावित आदिवासी परिवारों के लिए न्याय की मांग की है।

किसानों के रिकॉर्ड बदलने और विरोध के आरोप

सुंदरगढ़ के ग्रामीण प्रतिनिधि राकेश रोशन ने आरोप लगाया कि स्थानीय निवासी 2018 से भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि किसानों के भूमि रिकॉर्ड उनकी जानकारी या सहमति के बिना बदले गए और विरोध करने वालों पर कानूनी मुकदमे दर्ज किए गए। राकेश रोशन ने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम सभा द्वारा पहले सहमति देने से इनकार करने के बावजूद, अधिग्रहीत क्षेत्र में खनन गतिविधियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं।

ओडिशा AAP अध्यक्ष की चेतावनी

AAP की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष निशाकांत महापात्र ने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि क्षेत्र एक अनुसूचित क्षेत्र होने के बावजूद PESA अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह भूमि अधिग्रहण क्षेत्र के हजारों लोगों की आजीविका के लिए खतरा पैदा कर रहा है। महापात्र ने सरकार से आग्रह किया कि ग्राम सभा की सहमति के बिना चल रही अधिग्रहण प्रक्रिया को वापस लिया जाए और प्रभावित समुदायों के साथ बातचीत की जाए।

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