पीतमपुरा रामलीला में रावण के साथ जलेगा कॉकरोच का पुतला, AAP ने जताई आपत्ति, FIR की मांग

दिल्ली के पीतमपुरा में इस साल की दशहरे की तैयारी को लेकर एक अनोखा विवाद खड़ा हो गया है। श्री केशव रामलीला कमेटी (NSP) ने इस बार पारंपरिक पुतलों के साथ एक 30 फीट ऊंचे कॉकरोच के पुतले को जलाने का फैसला किया है। इस कदम पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने कड़ी आपत्ति जताई है और मामले की शिकायत दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) और पुलिस कमिश्नर से की है।
AAP के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस फैसले को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि पवित्र हिंदू परंपराओं में बदलाव कर समुदायों के बीच नफरत फैलाने की कोशिश की जा रही है। भारद्वाज ने इस विवादित कंटेंट को मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने की मांग की है और कहा है कि यदि इस मामले में FIR दर्ज नहीं हुई, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
गंदगी मिटाने का संदेश या परंपरा से छेड़छाड़?
इस विवाद की जड़ में रामलीला कमेटी का वह फैसला है, जिसके तहत रावण, कुंभकरण और मेघनाद के साथ कॉकरोच का पुतला भी फूंका जाएगा। कमेटी के अध्यक्ष और भाजपा विधायक अशोक गोयल देवराहा का कहना है कि यह फैसला समाज, घर और आसपास की गंदगी को खत्म करने का संदेश देने के लिए लिया गया है। उनके अनुसार, विजयादशमी सत्य की असत्य पर जीत का प्रतीक है और इस साल 'गंदगी' को बुराई मानकर उसे जलाने का निर्णय लिया गया है।
गोयल देवराहा ने स्पष्ट किया कि कमेटी पहले भी देश की समस्याओं, जैसे नक्सलवाद या आतंकवाद के प्रतीक पुतले जला चुकी है। इस बार कॉकरोच को गंदगी के प्रतीक के रूप में चुना गया है ताकि लोगों का ध्यान स्वच्छता की ओर आकर्षित किया जा सके।
वहीं, इन पुतलों को तैयार कर रहे कारीगर शाहवेज खान ने बताया कि उनके परिवार की कई पीढ़ियां पुतले बनाने का काम कर रही हैं। रावण और उसके साथियों के पुतले बनाने में जहां एक महीना लगता है, वहीं इस खास कॉकरोच के पुतले को तैयार करने में करीब 3-4 दिन का समय लगा है।