AQI डेटा में हेरफेर का आरोप: AAP ने दिल्ली सरकार के खिलाफ की शिकायत
आम आदमी पार्टी ने CPCB और CAQM से दिल्ली सरकार द्वारा AQI डेटा में हेरफेर की शिकायत की है।

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी का गंभीर आरोप है कि दिल्ली सरकार वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़ों में जानबूझकर हेरफेर कर रही है ताकि शहर में प्रदूषण की वास्तविक स्थिति को छिपाया जा सके।
AAP दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस मामले में सीधा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदूषण निगरानी केंद्रों के आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा की भूमिका की जांच की मांग की है। भारद्वाज के अनुसार, AQI रीडिंग को कृत्रिम रूप से कम करने की एक सोची-समझी साजिश रची जा रही है, जिससे लाखों दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
निगरानी केंद्रों पर पानी छिड़काव का लगाया आरोप
अपनी शिकायत के समर्थन में सौरभ भारद्वाज ने कुछ सबूत भी पेश किए हैं। उन्होंने जहांगीरपुरी स्थित ITI के पास एक निरंतर परिवेश वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (CAAQMS) का वीडियो साझा किया, जो 3 नवंबर को रिकॉर्ड किया गया था। इस वीडियो में कथित तौर पर निगरानी उपकरणों पर सीधे पानी का छिड़काव करते हुए दिखाया गया है। इसके अलावा, उन्होंने बुराड़ी विधायक संजीव झा द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो का भी हवाला दिया।
पार्टी का दावा है कि सेंसर के पास पानी छिड़कने से PM 2.5 और PM 10 की रीडिंग कृत्रिम रूप से कम हो जाती है, जिससे हवा साफ दिखने लगती है जबकि असलियत कुछ और होती है। AAP का कहना है कि जहांगीरपुरी की यह घटना कोई अकेली वारदात नहीं है, बल्कि दिल्ली के कई इलाकों में इसी तरह की अनियमितताएं चल रही हैं।
पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सटीक डेटा को दबाया गया, तो 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) का सही क्रियान्वयन नहीं हो पाएगा। इसका सीधा असर भारी वाहनों पर प्रतिबंध, औद्योगिक गतिविधियों और धूल नियंत्रण के उपायों पर पड़ेगा। AAP ने CPCB और CAQM से मांग की है कि दिल्ली के सभी निगरानी केंद्रों की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की जाए और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के डेटा सिस्टम का ऑडिट किया जाए। साथ ही, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की गई है।