AQI डेटा में हेरफेर का आरोप: AAP ने मुख्यमंत्री और पर्यावरण मंत्री के खिलाफ मांगी कानूनी कार्रवाई
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली सरकार पर प्रदूषण के आंकड़ों को कम दिखाने का गंभीर आरोप लगाया है और मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रशासन जानबूझकर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के आंकड़ों में हेरफेर कर रहा है ताकि प्रदूषण का स्तर वास्तव में जितना है, उससे कम दिखाई दे। AAP ने इस मामले में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग की है।
AAP दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि सरकार जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से जहांगीरपुरी स्थित ITI के निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र (Monitoring Station) का जिक्र किया। आरोप है कि प्रदूषण सेंसरों के ऊपर और उनके आसपास सीधे पानी का छिड़काव किया जा रहा है, ताकि PM2.5 और PM10 की सघनता कम दर्ज हो और AQI का स्तर घटा हुआ दिखाई दे।
ग्रीन जोन में लगाए स्टेशन और डेटा ऑडिट की मांग
सौरभ भारद्वाज ने आगे दावा किया कि सरकार ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत शहर के उन इलाकों में 20 अतिरिक्त निगरानी स्टेशन लगाए हैं जहाँ हरियाली अधिक है। ऐसा इसलिए किया गया ताकि जब पूरे शहर का औसत AQI निकाला जाए, तो वह कम आए और सरकार की छवि बेहतर दिखे। AAP का कहना है कि इस तरह के फर्जी आंकड़ों से लोगों में एक झूठी सुरक्षा की भावना पैदा हो रही है, जो बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा या COPD से पीड़ित मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
इस गंभीर मामले की औपचारिक शिकायत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को सौंपी गई है। पार्टी ने मांग की है कि इन स्टेशनों के साथ की गई भौतिक छेड़छाड़ की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच हो और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) द्वारा संचालित डेटा अधिग्रहण प्रणालियों का पूरा ऑडिट किया जाए।
फिलहाल, बुधवार दोपहर तक दिल्ली सरकार और भाजपा की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।