दिल्ली में 88 साल की बुजुर्ग महिला से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 78 लाख रुपये की ठगी

दिल्ली के सरिता विहार इलाके में एक 88 साल की बुजुर्ग महिला के साथ 78 लाख रुपये की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। यह पूरी घटना दस दिनों तक चली और साइबर ठगों ने इसे एक सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया। यह घटना 24 अगस्त 2026 को शाम करीब 5:30 बजे शुरू हुई थी जब ठगों ने महिला से संपर्क किया। ठगों ने खुद को कानून प्रवर्तन और न्यायिक अधिकारी बताया था और महिला पर मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोप लगाए थे। ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए महिला पर वर्चुअल निगरानी रखी और उसे डिजिटल अरेस्ट कर लिया।
दबाव में आकर पीड़िता ने ठगों के बताए अनुसार दो बार में कुल 78 लाख रुपये ट्रांसफर किए। पीड़िता ने 1 सितंबर 2026 को 51 लाख रुपये और 2 सितंबर 2026 को 27 लाख रुपये ट्रांसफर किए। इस धोखाधड़ी का खुलासा 2 सितंबर 2026 को तब हुआ जब पीड़िता की बड़ी बेटी को 27 लाख रुपये के आरटीजीएस लेनदेन का ईमेल नोटिफिकेशन मिला। इसके बाद नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई और दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है।
इस तरह के मामलों को लेकर गृह मंत्रालय और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने स्पष्ट किया है कि किसी भी एजेंसी के पास वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी करने का अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की निगरानी कर रहा है और 16 सितंबर 2026 को इस पर सुनवाई होनी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भारतीय रिजर्व बैंक को साइबर धोखाधड़ी के मामलों में बैंक खातों पर रोक लगाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने का काम सौंपा गया है।