नई दिल्ली में तीन दिवसीय सातवां नदी उत्सव इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में शुक्रवार को संपन्न हुआ। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य लोगों को नदियों और उनकी सांस्कृतिक विरासत से दोबारा जोड़ना था। 24 सितंबर से शुरू हुए इस आयोजन में कलाकारों, फिल्म निर्माताओं, शोधकर्ताओं और पर्यावरण प्रेमियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान नदियों पर आधारित चर्चाएं, फिल्में, फोटोग्राफी प्रदर्शनियां और नाटक आयोजित किए गए। समापन समारोह में IGNCA के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि लोगों को नदियों को केवल भौगोलिक स्थान नहीं मानना चाहिए, बल्कि उनके साथ गहरा रिश्ता बनाना चाहिए। उन्होंने चंबल, बेतवा और केन नदियों से अपने जुड़ाव को याद करते हुए समाज को नदियों के प्रति अपनी संवेदनशीलता पर विचार करने को कहा। उन्होंने कहा कि केवल पुल पार करने से नदी को नहीं समझा जा सकता, बल्कि इसके लिए नदी के करीब जाना होगा।
यमुना रिवर इनिशिएटिव (YaRI) की मानद सचिव अंबिका पंत ने बच्चों को नदी और उसके इतिहास से परिचित कराने की बात कही। उन्होंने बताया कि स्कूली बच्चों को यमुना से जोड़ने के काम के दौरान यह सामने आया कि कई बच्चे नदी के बारे में बहुत कम जानते हैं और वे यह नहीं जानते कि दिल्ली में यमुना का 22 किलोमीटर का प्रदूषित हिस्सा पूरी नदी का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। IGNCA के जनसंपदा विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर के. अनिल कुमार ने कहा कि इस उत्सव ने नदियों के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहलुओं पर चर्चा करने का मंच प्रदान किया। IGNCA के मीडिया सेंटर के समन्वयक अनुराग पुनेठ ने कहा कि नदी की स्थिति को समझने और उससे मजबूत रिश्ता बनाने के लिए लोगों को नदी के करीब जाना होगा। नदी उत्सव के संयोजक अभय मिश्रा ने भी नदियों की बदलती स्थिति को स्वीकार करने और समस्याओं से मुंह न मोड़ने की बात कही।
समापन समारोह में द रिवर एज एन आर्चिविस्ट नामक वृत्तचित्र फिल्म प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा की गई।
देवांग सैकिया की असमिया फिल्म नोर कथा और बिश्वाजीत दास की असमिया फिल्म वेयर डिड अवर रिवर फ्लो टू को संयुक्त रूप से पहला पुरस्कार मिला। जयश्री बोरगोहाईं की नेपाली फिल्म व्हेन इट ऑल वेंट डार्क को दूसरा और सलमा सुल्ताना की हिंदी और बंगाली फिल्म बराक बियॉन्ड द मैप को तीसरा स्थान मिला। अंतिम दिन टू सेंचुरीज ऑफ यमुना सत्र में नदी के बदलते मार्ग और इतिहास पर चर्चा हुई। नवीन वत्स ने नदी फोटोग्राफी पर विशेष बातचीत की। ग्रीन इंडिया फाउंडेशन ने रिवर्स बिगिन ऑन लैंड सत्र में वनों, वर्षा, मिट्टी और बाढ़ के मैदानों की नदी के स्वास्थ्य से जुड़ी भूमिका पर चर्चा की। इस तीन दिवसीय उत्सव का समापन निर्देशक फूलकुमारी के नाटक यमुना ट्रैवल्स प्राइवेट अनलिमिटेड के मंचन के साथ हुआ।