लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम का किया उद्घाटन

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम का उद्घाटन किया, जिसमें 21 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

Kittu Kumari26 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम का किया उद्घाटन

देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक कॉन्स्टिट्यूशन हॉल में 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम (12th BRICS Parliamentary Forum) की शुरुआत हो गई है। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 26 अक्टूबर को इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन किया। इस दो दिवसीय आयोजन में ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों और 10 भागीदार राष्ट्रों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, जो वैश्विक सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती देने के लिए एकजुट हुए हैं।

इस बार के फोरम की थीम "Fostering Parliaments for People-Centric Development" रखी गई है, जिसका सीधा मकसद आम लोगों के विकास को केंद्र में रखकर संसदीय कार्यप्रणाली को बेहतर बनाना है। अपने संबोधन के दौरान ओम बिरला ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के कॉन्स्टिट्यूशन हॉल में इन प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी करना भारत के लिए गर्व की बात है। उन्होंने जोर दिया कि यह आयोजन आपसी सम्मान, संवाद और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सभी देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ग्लोबल गवर्नेंस और डिजिटल बदलाव पर चर्चा

यह समिट 27 अक्टूबर तक चलेगी, जिसमें चार उच्च स्तरीय सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में संस्थागत लचीलेपन, एथिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार और सतत विकास जैसे गंभीर विषयों पर मंथन होगा। फोरम के अध्यक्ष के रूप में ओम बिरला ने जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता बताई। साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों के लिए भारत की पुरजोर वकालत को एक बार फिर दोहराया।

मुख्य कार्यक्रम से पहले ओम बिरला ने कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इसमें रूसी स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन के साथ उनकी मुलाकात खास रही, जिसमें संसदीय संबंधों को मजबूत करने और आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति पर चर्चा हुई। इस आयोजन की अहमियत इस बात से भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आने वाले प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे। यह समिट भारत की संसदीय कूटनीति के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है, क्योंकि इसके बाद इस जिम्मेदारी का नेतृत्व चीन के पास जाएगा।

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