नई दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम का आगाज, जन-केंद्रित विकास पर होगा मंथन
नई दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम का आयोजन हो रहा है, जिसमें 21 देशों के प्रतिनिधि जन-केंद्रित विकास पर चर्चा करेंगे।

भारत की राजधानी नई दिल्ली एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्र बन गई है। संसद भवन परिसर के संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में 12वें BRICS Parliamentary Forum की मेजबानी भारत कर रहा है। 26 और 27 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में दुनिया के 21 देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। इस बार के फोरम का मुख्य विषय 'जन-केंद्रित विकास के लिए parliaments को मजबूत करना' रखा गया है, जिसका मकसद आम लोगों के जीवन में सुधार लाने वाली नीतियों पर चर्चा करना है।
इस महत्वपूर्ण आयोजन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे, जो विभिन्न देशों के स्पीकरों और प्रतिनिधिमंडलों के साथ मुलाकात भी करेंगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस समिट को भारत की संसदीय कूटनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत बताया है। कार्यक्रम की शुरुआत से पहले ही हलचल तेज हो गई थी, जहां ओम बिरला ने रूसी प्रतिनिधिमंडल के नेता और स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस मुलाकात में वैश्विक मंचों पर सहयोग बढ़ाने और आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई लड़ने जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई।
AI और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर केंद्रित होंगे सत्र
इस फोरम में कुल 11 सदस्य देशों और 10 भागीदार देशों की भागीदारी है। सम्मेलन के दौरान चार हाई-लेवल सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में नवाचार, वैश्विक शासन (Global Governance), लचीलापन (Resilience) और सतत विकास जैसे आधुनिक विषयों पर गहन विचार-विमर्श होगा।
इसके अलावा, इस आयोजन में 64 देशों के संसदीय मैत्री समूहों की बैठकें भी होंगी। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मामलों की संसदीय समितियों के अध्यक्षों का एक विशेष समूह भी जुटेगा, जो विधायी सर्वोत्तम प्रथाओं और क्षमता निर्माण के तरीकों पर बात करेगा। हालांकि, कुछ देशों की अनुपस्थिति भी दर्ज की गई है; सऊदी अरब और इथियोपिया ने आने में असमर्थता जताई है, वहीं ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ अपरिहार्य कारणों से नहीं पहुंच सके, लेकिन ईरान का प्रतिनिधिमंडल कार्यक्रम में शामिल है।